मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने निर्वाचन क्षेत्र विकास निधि योजना में कई सुधारों की घोषणा की
श्रीनगर 29 अक्टूबर। मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने निर्वाचन क्षेत्र विकास निधियोजना में कई महत्वपूर्ण सुधारों की घोषणा की, जिनका उद्देश्य इसे अधिक पारदर्शी और स्थानीय विकास की आवश्यकताओं के प्रति उत्तरदायी बनाना है।
जम्मू और कश्मीर विधानसभा के चल रहे शरद सत्र के शून्यकाल के दौरान बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार सीडीएफ दिशा-निर्देशों को सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना के अनुरूप कर रही है ताकि समानता सुनिश्चित की जा सके और विधायकों को अपने निर्वाचन क्षेत्रों में विकास कार्यों की व्यापक श्रेणी अपनाने की अनुमति मिले।
मुख्यमंत्री ने कहा, “एमपीएलएडीएस के अनुरूपता से हमारे माननीय सदस्यों को ऐसे परियोजनाओं को लागू करने की सुविधा होगी जो जनता को प्रत्यक्ष लाभ पहुँचाएँ, ठीक उसी प्रकार जैसे सांसद अपने क्षेत्रों में करते हैं।”
संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत कई प्रमुख सुधार किए गए हैं। पावर डेवलपमेंट कार्यों पर पहले लगाए गए 50 लाख रुपये की सीमा हटा दी गई है, जिससे अब विधायक इस क्षेत्र में बिना किसी सीमा के परियोजनाएँ सुझा सकेंगे। इसी तरह सौर ऊर्जा लाइट सिस्टम की स्थापना पर 10 लाख रुपये की सीमा भी समाप्त की गई है।
लोक स्वास्थ्य अभियांत्रिकी क्षेत्र में मोबाइल वॉटर टैंकरों की खरीद और व्यक्तिगत घरेलू कनेक्शन देने की अनुमति दी गई है। नए प्रावधानों के तहत स्कूल वैन और बसों की खरीद की भी अनुमति होगी, जबकि स्वास्थ्य क्षेत्र के अंतर्गत विधायक अब व्हीलचेयर, ट्राइसाइकिल, इलेक्ट्रिक स्कूटी तथा अन्य सहायक उपकरणों की खरीद का सुझाव दे सकते हैं।
प्रा.तिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों की कठिनाइयों को ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री ने एक बार की छूट की घोषणा की, जिसके तहत वर्तमान और अगले वित्तीय वर्ष (2025-26 और 2026-27) में सीडीएफ से अधिकतम 50 लाख रुपये तक का उपयोग प्रभावित परिवारों के मकान निर्माण या मरम्मत के लिए किया जा सकेगा।
एक अन्य बड़े सुधार के रूप में यह प्रावधान समाप्त कर दिया गया है कि विधायकों को एक वित्तीय वर्ष में कम से कम 80 प्रतिशत निधि का उपयोग करना आवश्यक होगा, अन्यथा अगले वर्ष की राशि रोकी जाएगी। इससे संचालन में अधिक लचीलापन मिलेगा।
मुख्यमंत्री ने कहा कि संशोधित दिशा-निर्देश सीडीएफ योजना को एमपीएलएडी योजना के अधिक निकट लाएँगे, साथ ही इसे स्थानीय आवश्यकताओं और सामाजिक कल्याण की विशिष्ट गतिविधियों के अनुरूप बनाए रखेंगे।
उन्होंने कहा कि भूकंप, बाढ़ और सूखे जैसी प्रा.तिक आपदाओं से प्रभावित लोगों के लिए अस्थायी शरण स्थल निर्माण जैसी गतिविधियाँ सीडीएफ में स्वीकार्य बनी रहेंगी। इसी प्रकार वृद्धाश्रमों, अनाथालयों और आश्रय स्थलों को आवश्यक वस्तुएँ जैसे बिस्तर, बर्तन, किताबें और वर्दी खरीदने के लिए अधिकतम 3 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता मिलती रहेगी।
मुख्यमंत्री ने जोड़ा कि युवा क्लबों और खेल संगठनों को खेल सामग्री खरीदने के लिए सरकारी मान्यता प्राप्त एजेंसियों के माध्यम से 3 लाख रुपये तक की अनुदान राशि दी जा सकेगी।
उन्होंने आगे कहा कि जो विधायक आपदा प्रभावित नहीं हैं, वे बाढ़, चक्रवात, भूकंप या सूखे जैसी आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों में कार्यों हेतु अधिकतम 10 लाख रुपये का योगदान कर सकते हैं, जो संबंधित उपायुक्तों या मुख्यमंत्री राहत कोष के माध्यम से उपयोग किया जाएगा।
संशोधित दिशा-निर्देशों के तहत सीडीएफ से 20 लाख रुपये तक की राशि जनजातीय और बीपीएल परिवारों के आवास सुधार हेतु भी दी जा सकेगी। यह सहायता प्रधानमंत्री आवास योजना के मानकों के अनुरूप होगी और पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु सख्त सत्यापन और जांच नियमों से शासित होगी।
मुख्यमंत्री ने कहा, “इन सुधारों का उद्देश्य सीडीएफ योजना को अधिक समावेशी, उत्तरदायी और विकासोन्मुख बनाना है ताकि हमारे विधायक अपने लोगों की आवश्यकताओं को सीधे पूरा कर सकें।”