मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ के उठाए गए कदम को उनके खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए -वहीद पारा

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श्रीनगर, 26 दिसंबर पीपल्स डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता और पुलवामा के विधायक वहीद पारा ने शुक्रवार को कहा कि मीरवाइज़ उमर फ़ारूक़ ने शांति के प्रतीक के रूप में ऐपीएचसी टैग हटाया है और इस कदम को उनके खिलाफ हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। पारा ने संकेत दिया कि अपने वेरिफाइड एक्स प्रोफ़ाइल से चेयरमैन ऑल पार्टीज़ हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के रूप में अपना पदनाम हटाकर, मीरवाइज़ ने कठोरता के बजाय शांति को चुना।

इस्लामी इतिहास से एक किस्सा सुनाते हुए पुलवामा के विधायक ने कहा कि हुदैबिया की संधि में पैगंबर ने शांति के हित में मुहम्मद-उर-रसूलुल्लाह शब्दों को मिटाने पर सहमति व्यक्त की थी जो कलिमा की नींव है। उन्होंने आगे कहा कि इतिहास इसे समझौता नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और नैतिक साहस के रूप में याद करता है।

उन्होंने कहा कि जो लोग इस फैसले के लिए उन पर हमला कर रहे हैं और ट्रोल कर रहे हैं वे जानबूझकर उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं उनके रास्ते को और मुश्किल बना रहे हैं इसके बावजूद कि उन्होंने असाधारण चुनौतियों का सामना किया है और उनके पिता ने सर्वाेच्च बलिदान दिया है।

एकस पर एक पोस्ट में वहीद पारा ने लिखा हुदैबिया की संधि में पैगंबर ने सिर्फ शांति के हित में मुहम्मद-उर-रसूलुल्लाह शब्द हटाने पर सहमति जताई थी जो कलमा की नींव है। इतिहास इसे समझौता नहीं बल्कि बुद्धिमत्ता, दूरदर्शिता और नैतिक साहस के रूप में याद करता है।”

उन्होंने आगे कहा कि अगर मीरवाइज कश्मीर ने शांति के कार्य के रूप में ऐपीएचसी टैग हटाया है तो इसे कभी भी उनके खिलाफ हथियार के तौर पर इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। कठोरता के बजाय शांति चुनना कमजोरी नहीं है यह नेतृत्व है।

मीरवाइज ने कानून और परिस्थितियों के दायरे में काम किया है। जो लोग इस फैसले के लिए उन पर हमला कर रहे हैं और उन्हें ट्रोल कर रहे हैं वे जानबूझकर उन्हें कमजोर करने की कोशिश कर रहे हैं जिससे उनके रास्ते में और मुश्किलें आ रही हैं जबकि उन्होंने पहले ही असाधारण चुनौतियों का सामना किया है और उनके पिता ने सर्वाेच्च बलिदान दिया है। ऐसे हमले न्याय या शांति की सेवा नहीं करते वे केवल विभाजन को गहरा करते हैं। उन्होंने पोस्ट का समापन किया।

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