# भारत और चीन को प्रतिद्वंद्वी नहीं, सहयोगी साझेदार के रूप में देखना चाहिए : बीजिंग
**बीजिंग, 8 जून:** चीन ने सोमवार को कहा कि भारत और चीन को इस “सही रणनीतिक समझ” पर कायम रहना चाहिए कि दोनों देश प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं और एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता लिन जियान ने यहां आयोजित एक मीडिया ब्रीफिंग में यह टिप्पणी की। उनसे व्लादिमीर पुतिन द्वारा चीन-भारत संबंधों तथा दोनों देशों के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखने के संबंध में की गई टिप्पणियों पर सवाल पूछा गया था।
लिन जियान ने कहा कि वर्तमान में चीन-भारत सीमा की स्थिति सामान्य रूप से स्थिर है और दोनों पक्षों के बीच संवाद का माध्यम सुचारु रूप से कार्य कर रहा है।
उन्होंने कहा, **“चीन और भारत को इस समझ पर कायम रहना चाहिए कि दोनों देश प्रतिस्पर्धी या प्रतिद्वंद्वी नहीं बल्कि सहयोगी साझेदार हैं तथा दोनों एक-दूसरे के विकास के लिए अवसर हैं, खतरा नहीं।”**
उन्होंने आगे कहा, **“दोनों पक्षों को द्विपक्षीय संबंधों को रणनीतिक दृष्टिकोण और दीर्घकालिक परिप्रेक्ष्य से देखना और संभालना चाहिए, आपसी विश्वास बढ़ाना चाहिए, सहयोग का विस्तार करना चाहिए, मतभेदों का उचित समाधान करना चाहिए तथा चीन-भारत संबंधों के स्वस्थ और स्थिर विकास को बढ़ावा देना चाहिए।”**
पाकिस्तान के साथ चीन के घनिष्ठ संबंधों को लेकर भारत की चिंताओं पर प्रतिक्रिया देते हुए लिन जियान ने कहा कि बीजिंग भारत और पाकिस्तान दोनों का समर्थन करता है ताकि वे संवाद और परामर्श के माध्यम से अपने मतभेदों का समाधान करें तथा क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखें।
भारत, चीन और रूस के संबंधों पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि तीनों देश उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं हैं और इनके बीच अच्छे संबंध बनाए रखना न केवल तीनों देशों के हित में है बल्कि विश्व शांति, सुरक्षा और स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण है।
उन्होंने कहा कि चीन त्रिपक्षीय सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए रूस और भारत के साथ संवाद बनाए रखने के लिए तैयार है।
इस बीच, प्रमुख वैश्विक समाचार एजेंसियों के प्रमुखों के साथ बातचीत के दौरान रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग दोनों की प्रशंसा की।
पुतिन ने कहा कि नई दिल्ली और बीजिंग के साथ रूस की दशकों पुरानी साझेदारी स्वाभाविक रूप से विकसित हुई है और दोनों संबंध पूरी तरह एक-दूसरे से स्वतंत्र हैं।
उन्होंने कहा, **“भारत और चीन के बीच संबंध अत्यंत संवेदनशील और बहुआयामी हैं तथा उनमें हस्तक्षेप करना उचित नहीं है। निश्चित रूप से हम अपने दोनों मित्रों — भारत और चीन — के साथ संवाद बनाए रखते हैं।”**
पुतिन ने कहा, **“राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों ही सीमा विवाद सहित आपसी हितों से जुड़े सभी मुद्दों को सुलझाने का प्रयास कर रहे हैं।”**
एशिया में रूस के रणनीतिक संतुलन को रेखांकित करते हुए पुतिन ने कहा कि भारत और चीन के साथ रूस के संबंध स्वाभाविक रूप से विकसित हुए हैं।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नई दिल्ली के साथ रूस का बढ़ता सहयोग बीजिंग के हितों की कीमत पर नहीं है, ठीक उसी तरह जैसे चीन के साथ रूस की गहरी साझेदारी भारत के साथ उसके संबंधों को प्रभावित नहीं करती।