फर्जीवाड़े पर लगी अदालत की मुहर: शिक्षक की नियुक्ति रद्द
जम्मू, सितम्बर 19:
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख उच्च न्यायालय की डिवीजन बेंच ने एक अहम फैसले में केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (CAT) के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें एक शिक्षक को सेवा में बहाल करने के निर्देश दिए गए थे। संबंधित शिक्षक पर आरोप था कि उसने अपनी नियुक्ति फर्जी 12वीं की मार्कशीट के आधार पर हासिल की थी।
यह मामला यूटी ऑफ जे&के बनाम रोशन दीन शीर्षक के तहत चला, जिसमें स्कूल शिक्षा विभाग ने दस्तावेज़ सत्यापन के दौरान पाया कि शिक्षक ने 2008 में शैक्षिक स्वयंसेवक (EV) से रहबर-ए-तालीम (ReT) में तब्दील होने के समय फर्जी प्रमाणपत्र जमा किया था। वास्तविक रिकॉर्ड से पता चला कि वह अंग्रेज़ी विषय में 2010 की परीक्षा में फेल हुआ था।
हालांकि, कैट ने यह कहते हुए उसकी बर्खास्तगी को निरस्त कर दिया था कि विभाग ने कोई अनुशासनात्मक जांच नहीं की और न ही शिक्षक को सुनवाई का अवसर दिया।
हाईकोर्ट ने कहा कि जब स्वयं शिक्षक ने 2021 में दोबारा परीक्षा देकर असली प्रमाणपत्र प्राप्त किया, तो यह उसकी फर्जी मार्कशीट की स्वीकृति थी। कोर्ट ने टिप्पणी की—“धोखाधड़ी हर गंभीर कार्य को निरस्त कर देती है” और ऐसे मामले में जांच करना “निरर्थक औपचारिकता” होती।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि शिक्षक की नियमित नियुक्ति स्वयं दस्तावेज़ों की पुष्टि पर आधारित थी और फर्जी प्रमाणपत्र पाए जाने पर उसका लाभ स्वतः समाप्त हो जाता है।
इस प्रकार, उच्च न्यायालय ने सरकार की अपील स्वीकार करते हुए, कैट का आदेश रद्द कर दिया और बर्खास्तगी को सही ठहराया।