जम्मू-कश्मीर में दूध और मटन उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए मुख्य सचिव ने रणनीतिक प्रयास करने पर जोर दिया

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श्रीनगर 09 अक्टूबर। मुख्य सचिव अटल डुल्लू ने .षि उत्पादन विभाग की एक उच्चस्तरीय बैठक की अध्यक्षता की, ताकि केंद्र शासित प्रदेश में दूध और मटन उत्पादन बढ़ाने के लिए उठाए जा रहे उपायों की समीक्षा की जा सके। उन्होंने कहा कि उचित नीतिगत हस्तक्षेप और विभागीय सहयोग के जरिये ये दोनों क्षेत्र विकास, मूल्य संवर्धन और उद्यमिता की अपार संभावनाएं रखते हैं।
बैठक में कृषि उत्पादन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव शैलेंद्र कुमार, स्कॉस्ट-जम्मू के उपकुलपति, एचएडीपी के प्रबंध निदेशक, डेयरी विकास के प्रबंध निदेशक, जम्मू और कश्मीर दोनों मंडलों के कृषि और भेड़ पालन निदेशक और विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे।
बैठक के दौरान मुख्य सचिव ने इन क्षेत्रों में ऐसे उदाहरण प्रस्तुत करने की आवश्यकता पर बल दिया जिन्हें दोहराया जा सके, ताकि जनसहभागिता और उद्यमिता को प्रेरणा मिल सके।
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर मुख्य रूप से उपभोक्ता राज्य होने के कारण दूध, मटन और इनके प्रसंस्.त उत्पादों के लिए एक बड़ा बाजार प्रदान करता है। स्थानीय मांग को पूरा करने के साथ-साथ, इन उत्पादों के वाणिज्यिक विस्तार और निर्यात की भी अपार संभावनाएँ मौजूद हैं।
मुख्य सचिव ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश को केवल पैकेजिंग और ब्रांडिंग से आगे बढ़ना चाहिए। ध्यान वैज्ञानिक प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन पर होना चाहिए जिससे उच्च मांग वाले उत्पाद तैयार किए जा सकें और लोगों को स्थायी आजीविका प्राप्त हो सके। उन्होंने स्थानीय उद्यमियों से डेयरी और पशुधन क्षेत्रों की संभावनाओं को रोजगार सृजन के लिए उपयोग में लाने का आह्वान किया।
बैठक के दौरान एपीडी के एसीएस शैलेंद्र कुमार ने जम्मू-कश्मीर में दूध और मटन उत्पादन की मौजूदा स्थिति और उपभोग पैटर्न का विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया। उन्होंने बताया कि डेयरी उत्पाद केंद्रशासित प्रदेश के दैनिक आहार का हिस्सा हैं जबकि मटन उपभोग देश में सबसे अधिक के स्तर पर है, जिससे निरंतर बाजार मांग बनी रहती है।
उन्होंने कहा कि विभाग ने मौजूदा अंतरालों का आकलन कर लिया है और उत्पादन तथा मूल्य संवर्धन दोनों को अगले कुछ वर्षों में बढ़ाने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है।
विभाग की प्रस्तुति के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में प्रति वर्ष 28.75 लाख मीट्रिक टन दूध का उत्पादन होता है और प्रति व्यक्ति उपलब्धता 577 ग्राम प्रति दिन है, जो राष्ट्रीय औसत 471 ग्राम से अधिक है। हालांकि, मौजूदा उत्पादन का केवल लगभग 4 प्रतिशत भाग संगठित क्षेत्र में है। विभाग ने अगले 5,7 वर्षों में कम से कम 20 प्रतिशत उत्पादन को संगठित क्षेत्र में लाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।
इस लक्ष्य को पाने के लिए विभाग .त्रिम गर्भाधान कवरेज बढ़ाने, उच्च आनुवंशिक गुणवत्ता वाले सांडों की प्राप्ति, सेक्स्ड सीमेन की सुविधा स्थापित करने और वैज्ञानिक चारे की पद्धतियों के माध्यम से चारा कमी के मुद्दों को सुलझाने की योजना बना रहा है।
अब तक करीब 1,600 “पशु सखी” (मैत्री) जमीनी स्तर पर एआई सेवाओं को प्रदान करने के लिए जोड़ी गई हैं, जबकि केंद्र शासित प्रदेश में दो सीमेन स्टेशन स्थापित किए जा रहे हैं। साथ ही अमेरिका से 40 एचजीएम सांडों की खरीद की जा रही है और प्रत्येक जिले में दूध प्रसंस्करण एवं चिलिंग इकाइयाँ स्थापित की जा रही हैं।
मटन उत्पादन के संदर्भ में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में वर्तमान में 43.68 लाख भेड़ें और 22.5 लाख बकरियाँ हैं, जो प्रतिवर्ष लगभग 370 लाख किलोग्राम मांस और 80 लाख किलोग्राम ऊन का उत्पादन करती हैं, जबकि स्थानीय मांग लगभग 545 लाख किलोग्राम मांस की है।
इस अंतर को पाटने के लिए विभाग ने भ्रूण हस्तांतरण तकनीक और बहु अंडोत्सर्जन एवं भ्रूण हस्तांतरण जैसी उन्नत प्रजनन तकनीकों को अपनाने की प्रक्रिया शुरू की है।

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