**जम्मू-कश्मीर जल्द होगा आतंकवाद मुक्त: एलजी मनोज सिन्हा**
**मोदी सरकार कश्मीरी पंडितों की सम्मानजनक वापसी के लिए प्रतिबद्ध — युवाओं को नहीं भूलना चाहिए कि पाक-समर्थित आतंकियों ने निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों की भी हत्या की*
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जम्मू तवी, 19 फरवरी: कश्मीरी पंडितों की सम्मान और सुरक्षा के साथ वापसी सुनिश्चित करने के लिए Narendra Modi के नेतृत्व वाली सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल Manoj Sinha ने गुरुवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर जल्द ही आतंकवाद के अभिशाप से पूरी तरह मुक्त होगा।
यह बात उन्होंने प्रोफेसर अशोक कौल द्वारा लिखित पुस्तक **“Kashmir–Nativity Regained”** के विमोचन के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही। एलजी सिन्हा ने कहा, “पिछले कुछ वर्षों में सरकार और सुरक्षा बलों के सतत प्रयासों ने शांति और प्रगति को पटरी से उतारने की साजिश रचने वाली शक्तियों के नापाक मंसूबों को ध्वस्त कर दिया है।”
पुस्तक का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यह कश्मीरी पंडितों के पलायन की पीड़ा और उन काले दिनों के आतंक को उजागर करती है, साथ ही अपनी जड़ों से उखड़ जाने की स्थायी त्रासदी को भी अभिव्यक्त करती है। उन्होंने कहा कि “Kashmir–Nativity Regained” केवल एक साहित्यिक कृति नहीं, बल्कि दशकों से हमारी सामूहिक चेतना पर छाए मौन को तोड़ने का सराहनीय प्रयास है।
उपराज्यपाल ने कश्मीरी पंडित समुदाय की अदम्य भावना को नमन करते हुए कहा, “हर विस्थापित परिवार अपने भीतर कश्मीर की एक जीवित चिंगारी लेकर चला। संघर्ष और विपरीत परिस्थितियों की भट्टी में उन्होंने दर्शन, आध्यात्म, संस्कृति, भाषा और परंपराओं को संजोकर रखा। पीड़ा में भी उन्होंने संभावनाएं खोजीं और नई ऊंचाइयों को छुआ।”
उन्होंने बताया कि वर्ष 2021 में कश्मीरी प्रवासी वेब पोर्टल लॉन्च किया गया था, जिसका उद्देश्य कश्मीरी पंडित समुदाय की उन संपत्तियों और जमीनों को वापस दिलाना है, जिन पर अवैध कब्जा कर लिया गया था।
एलजी सिन्हा ने कहा, “दुनिया के सबसे बड़े दुखों में से एक है अपनी ही भूमि पर अजनबी बन जाना। जम्मू-कश्मीर में यही हुआ। 1989-90 में आतंकियों द्वारा कश्मीरी पंडितों के नरसंहार की पीड़ा इतनी गहरी है कि समय भी उसका मरहम नहीं बन सका। रातोंरात घर छोड़ने और जड़ों से उखड़ जाने का दर्द आज भी विस्थापित परिवारों की नसों में कांटों की तरह चुभता है।”
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंक के तंत्र ने सच्चाई को दबाने की कोशिश की, लेकिन हम उन आतंकियों और उनके समर्थकों को कभी नहीं भूल सकते और न ही माफ कर सकते हैं, जिन्होंने पीढ़ियों की आत्मा पर प्रहार किया।
उपराज्यपाल ने कहा, “युवा पीढ़ी को कभी नहीं भूलना चाहिए कि पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने हजारों निर्दोष कश्मीरी मुसलमानों का भी खून बहाया है। कई घटनाएं इतनी हृदयविदारक हैं कि उनका वर्णन करने के लिए शब्द कम पड़ जाते हैं। पिछले वर्ष से उन परिवारों को न्याय दिलाने की प्रक्रिया शुरू हुई है और उनके रोजगार सहित अन्य आवश्यकताओं को पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं।”
उन्होंने कहा कि अगस्त 2019 में जब प्रधानमंत्री Narendra Modi ने अनुच्छेद 370 को समाप्त कर जम्मू-कश्मीर का पूर्ण एकीकरण किया, तब यह विश्वास जगा कि कश्मीरी पंडित समुदाय की नई पीढ़ी बिना भय के अपनी जड़ों को पुनः प्राप्त कर सकेगी।
एलजी ने आगे कहा कि प्रोफेसर कौल की यह पुस्तक कश्मीरी पंडित समुदाय की दृढ़ता की मार्मिक याद दिलाती है। “यह पुनर्निर्माण का युग है। अपने शब्दों के माध्यम से प्रोफेसर कौल दुनिया को संदेश देते हैं कि कश्मीरी पंडित समुदाय जम्मू-कश्मीर की कथा के केंद्र में है।”
कार्यक्रम में जम्मू विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उमेश राय, रीडर्स प्रेस के प्रकाशक राजीव झा, प्रो. नीलू रोहमेत्रा (डीन रिसर्च स्टडीज), डॉ. नीरज शर्मा (रजिस्ट्रार, जम्मू विश्वविद्यालय), साहित्य जगत की हस्तियां, विभिन्न क्षेत्रों के लोग और छात्र उपस्थित थे।