गृह मंत्रालय ने यूएपीए के तहत 23 और व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया**

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**श्रीनगर, 04 जुलाई:** केंद्रीय गृह मंत्रालय (एमएचए) ने शनिवार को गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत 23 और व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किया। इनमें जम्मू-कश्मीर के 11 मूल निवासी भी शामिल हैं। यह कदम पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से संचालित सीमा पार आतंकी नेटवर्क को कमजोर करने के उद्देश्य से उठाया गया है।

गृह मंत्रालय की अधिसूचना के अनुसार इन सभी नामों को यूएपीए की चौथी अनुसूची में शामिल किया गया है। वर्ष 2019 में कानून में संशोधन के बाद केंद्र सरकार को व्यक्तियों को सीधे आतंकवादी घोषित करने का अधिकार मिला था। इस नए निर्णय के साथ यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित व्यक्तियों की कुल संख्या बढ़कर 57 हो गई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार आतंकवाद के खिलाफ **”जीरो टॉलरेंस”** की नीति पर पूरी तरह प्रतिबद्ध है और भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।

गृह मंत्रालय के अनुसार, आतंकवादी घोषित किए गए 23 व्यक्तियों में 17 पाकिस्तान के नागरिक हैं, जबकि छह भारतीय नागरिक हैं। सभी वर्तमान में पाकिस्तान या पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) से सक्रिय बताए गए हैं। इन पर आतंकवादी हमलों, सीमा पार घुसपैठ, हथियारों की तस्करी, आतंकियों की भर्ती, वित्तीय सहायता और प्रतिबंधित आतंकी संगठनों को रसद उपलब्ध कराने के आरोप हैं।

जम्मू-कश्मीर के जिन 11 मूल निवासियों को आतंकवादी घोषित किया गया है, उनमें मसूद इलियास कश्मीरी, अब्दुल्ला जिहादी, फिरदौस अहमद भट, हारून रशीद गनई, बिलाल अहमद मीर, आबिद कयूम लोन, नजीर अहमद गुज्जर, मोहम्मद याकूब, ओवैस फारूक, वसीम नूर जट और मोहम्मद शाहिद फैसल शामिल हैं।

अधिसूचना में पाकिस्तान स्थित आतंकी संगठनों **जैश-ए-मोहम्मद**, **लश्कर-ए-तैयबा**, **जमात-उद-दावा**, **हरकत-उल-मुजाहिदीन**, **पाकिस्तान मरकजी मुस्लिम लीग**, **अल-कायदा** और **आईएसआईएस** से जुड़े आतंकियों के नाम भी शामिल किए गए हैं।

गृह मंत्रालय ने कहा कि इन व्यक्तियों को आतंकवादी घोषित किए जाने से उनके वित्तीय नेटवर्क, भर्ती गतिविधियों, आवाजाही और आतंकी संचालन क्षमता पर प्रभावी रोक लगाने में मदद मिलेगी। साथ ही सुरक्षा और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई को और मजबूत किया जा सकेगा।

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