किसानों के सबसे प्रिय रहे चौधरी चरण सिंह
डॉ.लोकेश कुमार
“सच्चा भारत गांवों में बसता है“ और एक राष्ट्र तभी समृद्ध हो सकता है जब उसका ग्रामीण क्षेत्र उन्नत हो। यह विचार हमारे पूर्व प्रधानमंत्री चौधरी चरण सिंह के थे। चौधरी चरण सिंह की जयंती 23 दिसंबर को मनाई जाती है। उनका जन्म 23 दिसंबर, 1902 को हुआ । उनकी जयंती पर 2001 से प्रत्येक वर्ष किसान दिवस के रूप में पूरे देश में मनाया जाता है, ताकि भारतीय कृषि और ग्रामीण विकास में उनके योगदान को याद किया जा सके । उनके प्रयासों से किसानों के शोषण को रोकने, मंडी बिल पारित कराने और भूमि राजस्व से छूट दिलाने जैसे उल्लेखनीय कार्यों को अंजाम दिया गया।
देश में ’काम के बदले अनाज’ कार्यक्रम भी उनकी प्रेरणा से प्रारंभ हुआ। वे किसानों के मसीहा, भूमि सुधारों के समर्थक, और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के उत्थान के लिए बहुत महत्वपूर्ण काम किए। वे भारत के पांचवें प्रधानमंत्री थे। राजनीति को सेवा के रूप में प्रारंभ करने वाले चौधरी चरण सिंह सबसे पहले ब्रिटिश काल में 1937 में छपरौली से उत्तर प्रदेश विधानसभा के लिए चुने गए। इसके बाद 1946, 1952, 1962 और 1967 में विधानसभा में अपने निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। वे 1946 में पंडित गोविंद बल्लभ पंत की सरकार में संसदीय सचिव बने और राजस्व, चिकित्सा एवं लोक स्वास्थ्य, न्याय, सूचना इत्यादि विभिन्न विभागों में अपने कार्य की दक्षता का परिचय दिया । उनको जून 1951 में राज्य के कैबिनेट मंत्री बनाया गया और न्याय तथा सूचना विभागों का प्रभार दिया गया। इसके बाद में 1954 में वे डॉ. सम्पूर्णानन्द के मंत्रिमंडल में राजस्व एवं कृषि मंत्री बने।
अप्रैल 1959 में उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देकर राजस्व एवं परिवहन विभाग का प्रभार संभाला । सी.बी. गुप्ता के मंत्रालय में चौधरी चरण सिंह गृह एवं कृषि मंत्री (1960) थे। श्रीमती सुचेता कृपलानी के मंत्रालय में वे कृषि एवं वन मंत्री (1962-63) रहे। उन्होंने 1965 में कृषि विभाग छोड़कर ,1966 में स्थानीय स्वशासन विभाग का प्रभार संभाल लिया। कांग्रेस विभाजन के बाद फरवरी 1970 में दूसरी बार वे कांग्रेस पार्टी के समर्थन से उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। हालांकि राज्य में 2 अक्टूबर 1970 को राष्ट्रपति शासन लागू कर दिया गया था। चौधरी चरण सिंह ने विभिन्न पदों पर रहते हुए उत्तर प्रदेश के लोगों की सेवा की और उनकी ख्याति एक किसान राजनेता के रूप में हो गई थी। उनकी प्रशासन पर पकड़, भाई- भतीजावाद और भ्रष्टाचार को बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करते थे। प्रतिभाशाली सांसद एवं व्यवहारवादी के रूप में चौधरी चरण सिंह अपने वाक्पटुता एवं दृढ़ विश्वास के लिए जाने जाते हैं।
उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार का पूरा श्रेय उन्हें ही जाता है। ग्रामीण देनदारों को राहत प्रदान करने वाला विभागीय ऋणमुक्ति विधेयक, 1939 को तैयार करने एवं इसे अंतिम रूप देने में उनकी महत्त्वपूर्ण भूमिका थी। ऋणमुक्ति विधेयक 1939 मुख्य रूप से भारत में, विशेषकर उत्तर प्रदेश में, ग्रामीण किसानों और देनदारों को साहूकारों के पंजों से बचाने के लिए यह बिल लाया गया था, जिसमें चौधरी चरण सिंह जैसे नेताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, और इसका उद्देश्य कृषि ऋणों से संबंधित मुद्दों को हल करना था, जिससे किसानों को न्याय और राहत मिल सके। यह विधेयक भूमि सुधार और ग्रामीण ऋणों के पुनर्गठन से जुड़ा था जिससे किसानों की स्थिति में सुधार किया जा सके। ग्रामीण क्षेत्रों में, खासकर उत्तर प्रदेश में, कर्जदारों (किसानों) को साहूकारों के शोषण से बचाना और कृषि ऋणों को नियंत्रित करना।
चरण सिंह ने इस विधेयक को तैयार करने और इसे अंतिम रूप देने में अहम भूमिका निभाई थी, जो किसानों के अधिकारों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस तरह के विधेयकों ने काश्तकारों (किरायेदार किसानों) के अधिकारों को मजबूती प्रदान की और भूमि सुधारों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाया, जिससे भूमि स्वामित्व और ऋणों के संबंध में अधिक समानता स्थापित हो सके। यह विधेयक 1939 के आसपास के भूमि सुधार आंदोलनों के प्रयासों का हिस्सा था, जिनका लक्ष्य ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना था। ऋणमुक्ति विधेयक 1939 किसानों और ग्रामीण देनदारों के लिए एक राहत उपाय था, जो भूमि सुधार और कृषि ऋणों के विनियमन के माध्यम से सामाजिक न्याय स्थापित करने का प्रयास करता था।
देश के वे ऐसा राजनेता थे जिन्होंने लोगों के बीच रहकर सरलता से कार्य करते हुए इतनी लोकप्रियता हासिल कर ली। एक समर्पित लोक कार्यकर्ता एवं सामाजिक न्याय में दृढ़ विश्वास रखने वाले चौधरी चरण सिंह को लाखों किसानों के बीच रहकर प्राप्त आत्मविश्वास से काफी बल मिला। चौधरी चरण सिंह ने अत्यंत साधारण जीवन व्यतीत किया और अपने खाली समय में वे पढ़ने और लिखने का काम करते थे। उनके द्वारा की गई पहल का ही परिणाम था कि उत्तर प्रदेश में मंत्रियों के वेतन और उन्हें मिलने वाले अन्य लाभों को काफी कम कर दिया गया था। मुख्यमंत्री के रूप में जोत अधिनियम, 1960 को लाने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका थी। यह अधिनियम जमीन रखने की अधिकतम सीमा को कम करने के उद्देश्य से लाया गया था ताकि राज्य भर में इसे एक समान बनाया जा सके। चौधरी चरण सिंह के मुख्य कार्यों में उत्तर प्रदेश में भूमि सुधार (ज़मींदारी उन्मूलन, जोत अधिनियम), किसानों और ग्रामीण भारत के सशक्तिकरण के लिए कानून बनाना और एक साधारण, गांधीवादी जीवनशैली के साथ एक कुशल प्रशासक के रूप में कार्य करना शामिल हैं।
वे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में और बाद में भारत के उप-प्रधानमंत्री के रूप में कार्य करते हुए ग्रामीण उत्थान और कृषि क्षेत्र को मजबूत करने पर बहुत ध्यान केंद्रित किया। वे एक विद्वान के रूप में, उन्होंने भारत की आर्थिक नीति में ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि के महत्व पर जोर दिया और इस विषय पर कई किताबें लिखीं। वे अपनी सादगी, सत्यनिष्ठा और नैतिक आचरण के लिए मशहूर थे, जिससे उन्हें किसानों के बीच अपार लोकप्रियता मिली। उनके द्वारा लिखी गई किताबें बहुत लोकप्रिय हैं-इनमें “भारत की गरीबी और उसका समाधान“, “जमींदारी उन्मूलन“ और “संयुक्त खेती का एक्स-रे“ किताबे लिखीं, जो आज भी प्रासंगिक बनी हुई हैं। बहलहाल, हम कह सकते हैं कि चौधरी चरण सिंह का जीवन का मुख्य कार्य भारत के ग्रामीण और कृषि क्षेत्र को मजबूत करना , खेती और किसानों के अधिकारों की रक्षा करना था।
(लेखक, स्वतंत्र पत्रकार हैं)