‘ऑपरेशन सिंदूर’ ने भारत की स्मार्ट शक्ति का प्रदर्शन किया : सेना प्रमुख
जम्मू, 19 मई : सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ भारत की “स्मार्ट शक्ति” का संतुलित प्रदर्शन था। उन्होंने कहा कि इस सैन्य कार्रवाई में सटीक हमले, रणनीतिक संदेश और कूटनीतिक संकेतों का समन्वित राष्ट्रीय जवाब देखने को मिला।
यहां सेंटर फॉर लैंड वारफेयर स्टडीज द्वारा आयोजित “सुरक्षा से समृद्धि : सतत राष्ट्रीय विकास के लिए स्मार्ट शक्ति” विषय पर आयोजित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इस अभियान ने दिखाया कि किस प्रकार सैन्य क्षमता को व्यापक राष्ट्रीय उद्देश्यों के साथ जोड़ा जा सकता है।
उन्होंने पिछले वर्ष 6 और 7 मई की रात को चलाए गए अभियान का जिक्र करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने 22 मिनट की सटीक कार्रवाई के दौरान पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के भीतर मौजूद आतंकवादी ढांचे को निशाना बनाया।
जनरल द्विवेदी ने कहा कि “ऑपरेशन सिंदूर” सैन्य सटीकता, सूचना नियंत्रण, कूटनीतिक संकेत और आर्थिक दृढ़ता का एक संयुक्त राष्ट्रीय उदाहरण था।
उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त करने के साथ-साथ लंबे समय से चली आ रही रणनीतिक सोच को भी चुनौती दी। वहीं 88 घंटे बाद कार्रवाई रोकने का फैसला भारत के संतुलित और सोच-समझकर उठाए गए कदम को दर्शाता है।
उन्होंने कहा कि 88 घंटे बाद जानबूझकर कार्रवाई रोकना स्मार्ट शक्ति का सबसे बड़ा उदाहरण था, जिसमें यह स्पष्ट था कि किस स्तर पर और कितनी ताकत का इस्तेमाल करना है।
गौरतलब है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ 22 अप्रैल 2025 को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में शुरू किया गया था, जिसमें 26 नागरिकों की मौत हुई थी। इस अभियान के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में स्थित आतंकवादी शिविरों को निशाना बनाया गया।
भारतीय सशस्त्र बलों ने बहावलपुर, मुरीदके और सियालकोट सहित पाकिस्तान के नौ आतंकवादी ठिकानों तथा पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूद शिविरों पर समन्वित तीनों सेनाओं की कार्रवाई के तहत सटीक निर्देशित हथियारों से हमला किया।
अपने संबोधन में जनरल द्विवेदी ने बदलते वैश्विक सुरक्षा हालात पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि दुनिया इस समय अव्यवस्था, अविश्वास और गठबंधनों में विभाजन के दौर से गुजर रही है।
उन्होंने कहा कि दुनिया से यह वादा किया गया था कि समृद्धि के कारण शक्ति आधारित राजनीति समाप्त हो जाएगी, लेकिन अब शक्ति राजनीति का इस्तेमाल समृद्धि को नियंत्रित करने के लिए किया जा रहा है।
सेना प्रमुख ने कहा कि वैश्विक रक्षा खर्च 2.7 ट्रिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक हो चुका है, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए अनुमानित बजट से भी ज्यादा है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक संघर्ष अब केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनका असर औद्योगिक उत्पादन, अनुसंधान तंत्र और शासन व्यवस्था तक पहुंच चुका है।
उन्होंने कहा कि सुरक्षा और समृद्धि के बीच की सीमा अब समाप्त हो चुकी है तथा सुरक्षा को आर्थिक विकास और राष्ट्रीय प्रगति की अनिवार्य शर्त के रूप में देखा जाना चाहिए।