ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं, आतंकी सोच के खात्मे तक शांति के प्रयास रहेंगे जारी: राजनाथ सिंह

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जयपुर, 15 जनवरी(हि.स.)। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि सेना दिवस मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व समर्पित करने वाले जवानों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अप्रतिम बलिदान की गाथा को स्मरण करने का दिन है। इन्हीं के कारण आज पूरा भारत सुरक्षित है। उन्होंने कहा कि राजस्थान के कण-कण में वीरता की गाथाएं समाई हैं। शौर्य, पराक्रम और त्याग की अमर कहानियों से यहां का इतिहास भरा हुआ है। राजस्थान की धरती ने हमेशा भारत की सैन्य परंपरा को आगे बढ़ाया है एवं इसे शक्ति तथा गरिमा भी प्रदान की है।

सिंह गुरुवार को 78वें सेना दिवस के अवसर पर सवाई मानसिंह स्टेडियम में आयोजित किए गए शौर्य संध्या कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि राजस्थान के वीरों ने भारत माता की सेवा में अपने शरीर का रक्त बहाया है। महाराणा प्रताप की तलवार से लेकर राणा सांगा के शौर्य तक, पन्नाधाय के त्याग से लेकर मीराबाई की भक्ति तक और भामाशाह की संपत्ति तक इस भूमि ने हर क्षेत्र में अद्भुत पुरूषार्थ का परिचय दिया है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि राजस्थान के सभी समुदायों के वीरों ने सेना में अपनी अमिट छाप छोड़ी है। आज भी राजस्थान के युवा सेना की विभिन्न रेजिमेंट में सेवारत होकर देश की सीमाओं पर रक्षा कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि राजस्थान के ऐतिहासिक किलों, महलों और स्मारकों ने सैकड़ों वर्षों से सैन्य क्षमता, रणनीति और साहस का पोषण किया है। ऐसी शौर्य भूमि पर शौर्य संध्या का आयोजन वीर सैनिकों के प्रति सच्ची श्रद्धांजलि है।

सिंह ने कहा कि 15 जनवरी का दिन भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों से अंकित है। वर्ष 1949 में भारतीय सेना ने पहली बार भारतीय सेना अध्यक्ष के नेतृत्व में कदम रखा। जनरल के.एम. करियप्पा ने भारतीय सेना के पहले कमाण्डर इन चीफ के रूप में पदभार ग्रहण किया। उन्होंने कहा कि यह घटना औपनिवेशिक मानसिकता से मुक्ति का, स्वाभिमान और स्वाधीनता की प्रतीक थी। तक से लेकर आज तक यह दिवस हमारे लिए संकल्प का दिवस है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि यह दिवस हमारे आत्ममंथन का भी अवसर है। हमारे लिए सब कुछ न्यौछावर करने वाले रक्षकों के प्रति कृतज्ञता और सम्मान का भाव निरंतर चला आ रहा है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में भारत ने सिर्फ अपनी सैन्य ताकत ही नहीं दिखाई बल्कि अपने राष्ट्रीय स्वभाव का भी परिचय दिया। आतंकियों के खिलाफ कार्रवाई पूरी तरह से सोच समझ कर और मानवीय मूल्यों को ध्यान में रखकर की गई।

सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर को भारत के इतिहास में सिर्फ सैन्य कार्रवाई के रूप में नहीं बल्कि साहस और संतुलन के प्रतीक के रूप में याद रखा जाएगा। ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि जब तक आतंकी सोच खत्म नहीं होती तब तक शांति के लिए हमारा यह प्रयास लगातार चलता रहेगा। उन्होंने राजस्थान की धरती से इसकी घोषणा की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सैनिक सिर्फ योद्धा नहीं होता बल्कि एक दार्शनिक और कुशल प्रबंधक भी होता है क्योंकि सैनिक का जीवन दर्शन ‘‘सेवा परमो धर्मः’’ पर आधारित है।

सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिक के लिए उसका कर्त्तव्य यज्ञ के समान होता है और उसका त्याग उसकी आहुति होती है। सैनिक अच्छे से जानता है कि उसके सभी कर्मों का फल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सम्पूर्ण राष्ट्र की सुरक्षा और समृद्धि के रूप में प्राप्त होता है। उन्होंने कहा कि यह निस्वार्थ सेवा का उच्चतम आदर्श है जिसकी परिकल्पना हमारे ऋषियों ने की।

रक्षा मंत्री ने कहा कि सेना की रेजिमेंट्स में विभिन्न राज्यों के नौजवान साथ-साथ एक-दूसरे के त्योहार मनाते हैं। एक-दूसरे की भाषा सीखते हैं और संकट में सहायक भी बनते हैं। सेना ने भारत की सामाजिक एकता को मजबूत बनाने में अतुल्य योगदान दिया है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना सिर्फ सैन्यबल नहीं है बल्कि यह राष्ट्र निर्माण का भी प्रमुख स्तंभ है। भारत में सीमाक्षेत्र के अलावा हर क्षेत्र में भी सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता का सेना पर अटूट विश्वास है और यह विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है।

रक्षा मंत्री ने कहा कि भारतीय सेना ने रिफॉर्म्स को तेजी से लागू किया है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में हम भारतीय सेना को दुनिया की सबसे सशक्त सेना बनाने की ओर अग्रसर हैं और वर्ष 2047 तक यह लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि दुनिया की मौजूदा स्थितियों से हम सभी परिचित हैं और स्थापित धारणाएं टूट रही हैं। दुनिया अनिश्चितताओं से गुजर रही है। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सेनाओं की मजबूती, आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता किसी भी देश के अस्तित्व के लिए आज बेहद महत्वपूर्ण है। वर्तमान स्थितियों में सेनाओं का मजबूत रहना सबसे सर्वोपरि है।

सिंह ने कहा कि इंटर सर्विसेज को भी लगातार मजबूत बनाना होगा क्योंकि जिस प्रकार युद्ध के आयामों का विस्तार हो रहा है उसे देखते हुए अब कुछ भी अप्रत्याशित नहीं रह गया है। उन्होंने कहा कि हमारी सेनाएं हमारी प्राथमिक ताकत हैं। इसलिए इसका सबके साथ फॉरवर्ड लुकअप कॉलेब्रेशन आवश्यक है। हमने प्रधानमंत्री के विजन से सेनाओं में महिलाओं की भूमिका को बढ़ाने के भी सकारात्मक प्रयास किए हैं। हमने आर्मी में शॉर्ट सर्विस कमीशन से कमीशन्ड महिलाओं को परमानेंट कमीशन में बदलने का प्रावधान कर दिया है। साथ ही, नेशनल डिफेंस एकेडमी में वर्ष 2021 से बेटियों के एडमिशन की भी शुरूआत की है।

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