मातृभूमि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और समर्पण हमारे राष्ट्र को विकसित भारत के निर्माण की दिशा में ले जाएगा: उपराज्यपाल
जम्मू, 7 नवंबर। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने संस्कृति विभाग द्वारा आयोजित ‘वंदे मातरम’ के 150वें वर्ष समारोह में भाग लिया।
उपराज्यपाल ने बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय को श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ पर आधारित प्रदर्शनी का अवलोकन किया। उन्होंने कहा कि बंकिम चंद्र ने माँ भारती और उनके पुत्रों के बीच के बंधन को मजबूत किया और लोगों को स्वतंत्रता प्राप्त करने के लिए प्रेरित किया।
उपराज्यपाल ने कहा कि मातृभूमि के प्रति हमारी प्रतिबद्धता और समर्पण हमारे राष्ट्र को विकसित भारत के भाग्य तक ले जाएगा। युवा पीढ़ी को यह याद रखना चाहिए कि वे इस महान सभ्यता के उत्तराधिकारी हैं और समाज की प्रगति और समृद्धि में उनका योगदान माँ भारती के लिए सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
वर्ष 2025 में वंदे मातरम के 150 वर्ष पूरे हो रहे हैं। बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित हमारा राष्ट्रीय गीत “वंदे मातरम” अक्षय नवमी के शुभ अवसर पर, जो 7 नवंबर 1875 को था, लिखा गया था। वंदे मातरम पहली बार साहित्यिक पत्रिका बंगदर्शन में उनके उपन्यास आनंदमठ के एक भाग के रूप में प्रकाशित हुआ था। मातृभूमि को शक्ति, समृद्धि और दिव्यता का प्रतीक बताते हुए इस गीत ने भारत की एकता और स्वाभिमान की जागृत भावना को काव्यात्मक अभिव्यक्ति दी। यह जल्द ही राष्ट्र के प्रति समर्पण का एक स्थायी प्रतीक बन गया। इस समारोह में समाज के सभी वर्गों के नागरिकों की भागीदारी के साथ “वंदे मातरम” के पूर्ण संस्करण का सामूहिक गायन हुआ।
इस अवसर पर जुगल किशोर शर्मा संसद सदस्य, राज्य सभा सांसद इंजी. गुलाम अली खटाना, मुख्य सचिव अटल डुल्लू, प्रमुख सचिव, गृह चंद्राकर भारती, पुलिस महानिरीक्षक जम्मू भीम सेन टूटी, प्रमुख सचिव संस्कृति बृज मोहन शर्मा, संभागीय आयुक्त जम्मू रमेश कुमार, प्रशासनिक सचिव, वरिष्ठ अधिकारी, शैक्षणिक संस्थानों के प्रमुख; युवा और गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।
जम्मू-कश्मीर के अधिकारी और आम लोग भी वर्चुअल माध्यम से केंद्र शासित प्रदेश स्तरीय स्मृति समारोह में शामिल हुए।