संविधान और लोकतंत्र हमारे लिए सर्वोपरि’, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा, पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा भारत
शुक्रवार, 15 अगस्त को पूरे देशभक्ति के जोश के साथ अपना 79वाँ स्वतंत्रता दिवस मनाने की तैयारी कर रहा है। इस अवसर पर, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू गुरुवार शाम को राष्ट्र के नाम अपना वार्षिक संबोधन दिया। स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर यह राष्ट्रपति मुर्मू का चौथा संबोधन है। अपने संबोधन के शुरूआत में उन्होंने कहा कि स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर आप सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस, हर भारतीय बड़े उत्साह के साथ मनाता है। ये दिन हमें विशेष रूप से हमारे गौरवशाली भारतीय होने की याद दिलाते हैं।
– आज हमने विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस मनाया। विभाजन के कारण भयावह हिंसा देखी गई और लाखों लोग विस्थापित होने के लिए मजबूर किए गए। आज हम इतिहास की गलतियों के शिकार हुए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
– हमारे संविधान में ऐसे चार मूल्यों का उल्लेख है जो हमारे लोकतंत्र को सुदृढ़ बनाए रखने वाले चार स्तंभ हैं। ये मूल्य हैं – न्याय, स्वतंत्रता, समता और बंधुता। ये हमारी सभ्यता के ऐसे सिद्धांत हैं जिन्हें हमने स्वाधीनता संग्राम के दौरान पुनः जीवंत बनाया। उन्होंने कहा कि भारत आत्मनिर्भर राष्ट्र बनने की राह पर है और पूरे आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ रहा है।
– आज़ादी हासिल करने के बाद, हम ऐसे लोकतंत्र की राह पर चल पड़े जहाँ हर वयस्क को मताधिकार प्राप्त हुआ। दूसरे शब्दों में, हम भारत के लोगों ने, अपने भाग्य को खुद गढ़ने का अधिकार खुद को दिया… तमाम चुनौतियों के बावजूद, भारत के लोगों ने लोकतंत्र को सफलतापूर्वक अपनाया… हमारे लिए, हमारा संविधान और हमारा लोकतंत्र सबसे ऊपर है।
– पिछले वित्त वर्ष में 6.5 प्रतिशत की सकल-घरेलू-उत्पाद-वृद्धि-दर के साथ भारत, दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में सबसे तेजी से बढ़ने वाला देश है। वैश्विक अर्थव्यवस्था में व्याप्त समस्याओं के बावजूद, घरेलू मांग में तेजी से वृद्धि हो रही है। मुद्रास्फीति पर नियंत्रण बना हुआ है। निर्यात बढ़ रहा है। सभी प्रमुख संकेतक, अर्थव्यवस्था की मजबूत स्थिति को दर्शा रहे हैं।र