आईयूएसटी का दूसरा दीक्षांत समारोह
युवा नवाचार, नए विचारों, नई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करें: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा
अवंतीपोरा: –उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने इस्लामिक यूनिवर्सिटी ऑफ साइंस एंड टेक्नोलॉजी अवंतीपोरा के दूसरे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
इस अवसर पर राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की मसौदा समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर के कस्तूरीरंगन मुख्य अतिथि थे।
उपराज्यपाल, जो विश्वविद्यालय के कुलपति भी हैं, ने स्नातक छात्रों और स्वर्ण पदक विजेताओं को उनकी उपलब्धियों के लिए शुभकामनाएं दीं।
उपराज्यपाल ने कहा “दीक्षांत समारोह संस्था द्वारा पोषित शाश्वत मूल्यों, विनम्रता, रचनात्मकता, धार्मिकता, व्यक्तित्व और करुणा का जश्न मनाने का भी एक अवसर है। ये मूल्य अदृश्य स्वर्ण पदक हैं जो छात्रों को देश का बेहतर भविष्य बनाने के लिए सशक्त बनाते हैं।’’ छात्रों और संकाय सदस्यों को संबोधित करते हुए, उपराज्यपाल ने युवाओं से नवाचार, नए विचारों, नई प्रौद्योगिकियों पर ध्यान केंद्रित करने का आह्वान किया जो भविष्य को आकार देंगे।
उन्होंने कहा “शिक्षा नई चेतना का जन्म है। यह समाज की ऊर्जा है। शिक्षा परमानंद है, उत्साह है, शिक्षा सशक्तिकरण है, शिक्षा संवर्धन है, शिक्षा छात्रों को जीवन में उच्चतम शिखर प्राप्त करने में सक्षम बनाती है।” उन्होंने कहा कि वास्तव में शिक्षित होने के लिए विषयों के बीच कृत्रिम बाधाओं को तोड़ने के साहस की आवश्यकता होती है, जो दुनिया में एक और मेमोरी हार्ड डिस्क बनने के बजाय स्वतंत्र सोच, रचनात्मकता, अनुसंधान और नए आविष्कारों को प्राथमिकता देते हैं।
उपराज्यपाल ने विश्वविद्यालयों, शैक्षणिक संस्थानों और शिक्षण समुदाय को भविष्योन्मुखी शिक्षण दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित किया जो कक्षाओं से परे जाकर छात्रों को भविष्य की चुनौतियों और अवसरों के लिए तैयार करता है। उन्होंने कहा “गति के इस युग में, शिक्षकों की भूमिका का विस्तार हुआ है। वे केवल सूचना प्रदाता या पाठ्यक्रम पूरा करने का माध्यम नहीं हैं। शिक्षक कारीगर हैं और उन्हें नई पीढ़ी के दिमाग और चेतना को आकार देने की जरूरत है।” माननीय प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के मार्गदर्शन में, राष्ट्रीय शिक्षा नीति हमारे छात्रों को मशीन-प्रधान दुनिया में सफल होने के लिए सशक्त बना रही है और इसे प्रत्येक छात्र के आंतरिक और बाहरी विकास में सही संतुलन सुनिश्चित करने के लिए मूल्य प्रणाली के साथ मिश्रित किया गया है। “शिक्षा को आंतरिक जिज्ञासा, आलोचनात्मक सोच को जागृत करना चाहिए, इसे कक्षाओं में अधिक प्रश्न उत्पन्न करने चाहिए और एक अज्ञात रास्ते पर चलने का साहस प्रदान करना चाहिए। एनईपी 2020 के माध्यम से यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया जा रहा है कि हमारी कक्षाएँ चार दीवारों के बजाय वास्तविक दुनिया को प्रतिबिंबित करें।”

हाल की तकनीकी प्रगति पर बोलते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि इसका समाज पर परिवर्तनकारी प्रभाव पड़ेगा। “प्रौद्योगिकी पहले से कहीं अधिक तेजी से आगे बढ़ रही है और यह हमारे रहने, मेलजोल, यात्रा और काम करने के तरीके को तेजी से बदल रही है। हमारी मानव पूंजी पूरी तरह से अलग भविष्य का सामना कर रही है और अब समय आ गया है कि हमारी कक्षाएँ और परिसर आमूलचूल बदलाव को पहचानें और एक नया पारिस्थितिकी तंत्र बनाएं।”
उन्होंने कहा, कक्षाओं और प्रयोगशालाओं को राष्ट्रीय शिक्षा नीति की तर्ज पर खुद को फिर से विकसित करने की जरूरत न केवल प्रतिस्पर्धा में बढ़त बनाए रखने के लिए है बल्कि प्रासंगिक बने रहने के लिए भी है।
इस बदलाव का असर मानविकी के क्षेत्र पर भी पड़ रहा है। तेजी से हो रहे बदलावों के बीच समावेशी समाज और सशक्त व्यक्ति के संकल्प को साकार करना और समाज में डिजिटल विभाजन को पाटना सबसे बड़ी चुनौती है। “हमारे सामने चुनौती उन कौशलों पर काम करने की है जो भविष्य में भी प्रासंगिक रहेंगे। हम 2050 तक की दुनिया की कल्पना नहीं कर सकते, लेकिन विश्लेषणात्मक, आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, जिज्ञासा, व्यक्तित्व, मौलिकता, विशिष्टता और नेतृत्व जैसे मुख्य कौशल प्रासंगिक बने रहेंगे।”
उपराज्यपाल ने छात्रों को अनुकूल शिक्षण वातावरण प्रदान करने और उन्हें राष्ट्र निर्माण में योगदान देने के लिए सशक्त बनाने के लिए आईयूएसटी के उपकुलपति और संकाय सदस्यों की भी सराहना की।
इस अवसर पर बोलते हुए, एनईपी मसौदा समिति के अध्यक्ष प्रोफेसर के कस्तूरीरंगन ने स्नातक छात्रों को बधाई दी और उनकी भावना, उत्साह और जिज्ञासा की सराहना की। उन्होंने एनईपी 2020 के प्रभावी कार्यान्वयन में विश्वविद्यालयों और शिक्षकों की महत्वपूर्ण भूमिका पर भी प्रकाश डाला। आईयूएसटी के उपकुलपति प्रोफेसर शकील अहमद रोमशू ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट प्रस्तुत की और विश्वविद्यालय की उपलब्धियों पर प्रकाश डाला।
दीक्षांत समारोह के दौरान 72 छात्रों को स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया, जबकि 147 छात्रों को योग्यता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया।
शैक्षणिक वर्ष 2020-21 और 2021-22 के लिए कुल 3000 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई है।
अध्यक्ष जिला विकास परिषद अनंतनाग चैधरी मो. यूसुफ गोर्सी, संसद सदस्य हसनैन मसूदी, उपराज्यपाल के सलाहकार राजीव राय भटनागर, विभिन्न विश्वविद्यालयों के उपकुलपति और पूर्व उपकुलपति, प्रोफेसर नसीर इकबाल, रजिस्ट्रार आईयूएसटी, संकाय सदस्यों और छात्रों ने दीक्षांत समारोह में भाग लिया।