**मुख्य सचिव ने जम्मू-कश्मीर के लिए ‘डेटा प्रबंधन रणनीति’ की समीक्षा की**

#### **नागरिकों को निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए एकीकृत डेटा इकोसिस्टम विकसित करने के दिए निर्देश**

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**श्रीनगर, 18 जुलाई 2026:**
डिजिटल सुशासन को मजबूत बनाने और नागरिकों को बिना किसी परेशानी के सरकारी सेवाएं उपलब्ध कराने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए **मुख्य सचिव अटल डुल्लू** ने जम्मू-कश्मीर में सभी सरकारी विभागों के लिए सुरक्षित, परस्पर समन्वित (इंटरऑपरेबल) और नागरिक-केंद्रित डेटा इकोसिस्टम विकसित करने के उद्देश्य से प्रस्तावित **‘डेटा प्रबंधन रणनीति एवं कार्ययोजना’** की समीक्षा के लिए एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की।

इस प्रस्तावित पहल का उद्देश्य सरकारी डेटा के सुरक्षित आदान-प्रदान और समन्वय के लिए एक एकीकृत ढांचा तैयार करना है, ताकि विभाग नागरिकों से बार-बार एक ही दस्तावेज मांगने के बजाय अधिकृत डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रमाणित जानकारी प्राप्त कर सकें। इससे विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होगा, रिकॉर्ड की पुनरावृत्ति समाप्त होगी, पारदर्शिता बढ़ेगी तथा कल्याणकारी योजनाओं और सार्वजनिक सेवाओं का लाभ अधिक तेज़ी और प्रभावी ढंग से लोगों तक पहुंच सकेगा।

बैठक में संबंधित प्रशासनिक सचिवों के अलावा **आयुक्त सचिव, योजना विकास एवं निगरानी विभाग (pd&md), प्रबंध निदेशक, जम्मू-कश्मीर बैंक, महानिदेशक (अर्थशास्त्र एवं सांख्यिकी), राज्य सूचना विज्ञान अधिकारी (nic), निदेशक योजना** तथा अन्य संबंधित विभागों के विभागाध्यक्ष उपस्थित थे।

प्रस्तावित ढांचे की समीक्षा करते हुए **मुख्य सचिव** ने कहा कि डिजिटल युग में प्रभावी शासन की आधारशिला प्रमाणिक, मानकीकृत और सुरक्षित डेटा की उपलब्धता है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न सरकारी विभाग बड़ी मात्रा में महत्वपूर्ण डेटा तैयार करते हैं, लेकिन उसकी वास्तविक उपयोगिता तभी सामने आएगी जब उसे एक समान डेटा गवर्नेंस ढांचे के तहत सुरक्षित तरीके से विभिन्न विभागों के बीच साझा किया जाएगा और उसका उपयोग बेहतर जनसेवा के लिए किया जाएगा।

मुख्य सचिव ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि नागरिकों को विभिन्न योजनाओं का लाभ लेने के लिए एक ही जानकारी बार-बार प्रस्तुत न करनी पड़े।

उन्होंने दोहराया कि सरकार का उद्देश्य ऐसा एकीकृत डिजिटल गवर्नेंस इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें सरकार के पास उपलब्ध प्रमाणित डेटा का उपयोग अधिकृत विभाग सुरक्षित तरीके से पात्र सेवाओं के वितरण के लिए कर सकें, जबकि नागरिकों की निजता, गोपनीयता और डेटा सुरक्षा का पूर्ण संरक्षण सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने सभी प्रशासनिक विभागों को निर्देश दिए कि वे इस रणनीति के क्रियान्वयन में पूर्ण सहयोग दें तथा निर्धारित **डेटा गवर्नेंस ढांचे** के अनुरूप अपने विभागीय डेटा का मानकीकरण सुनिश्चित करें।

**अटल डुल्लू** ने समान **मेटाडाटा मानकों**, मजबूत गुणवत्ता सुनिश्चित करने की व्यवस्था तथा सुरक्षित **इंटरऑपरेबिलिटी प्रोटोकॉल** अपनाने पर भी बल दिया, ताकि विभिन्न विभागों के बीच सूचनाओं का निर्बाध आदान-प्रदान संभव हो सके।

बैठक के दौरान **योजना विभाग** द्वारा प्रस्तावित डेटा प्रबंधन रणनीति के पांच प्रमुख स्तंभों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इनमें **डेटा गवर्नेंस एवं मानक, बेस रजिस्ट्रियां एवं यूनिक आइडेंटिफायर, इंटरऑपरेबिलिटी एवं समन्वय, डेटा सुरक्षा एवं गोपनीयता तथा संस्थागत क्षमता एवं समन्वय** शामिल हैं।

इस रणनीति का उद्देश्य **‘सिंगल सोर्स ऑफ ट्रुथ’** की अवधारणा स्थापित करना है, जिसके तहत विभागों के मूल डेटा को सुरक्षित रखते हुए अधिकृत उपयोगकर्ताओं के बीच **एपीआई (api)** आधारित सुरक्षित डेटा आदान-प्रदान सुनिश्चित किया जाएगा। इससे साक्ष्य-आधारित शासन, बेहतर योजना निर्माण तथा विकास कार्यक्रमों की प्रभावी निगरानी को बढ़ावा मिलेगा।

मुख्य सचिव ने **सिविल पंजीकरण प्रणाली (crs)** को **जम्मू-कश्मीर बैंक** के साथ जोड़ने के प्रस्ताव की भी समीक्षा की। इस व्यवस्था के लागू होने पर मृत्यु प्रमाणपत्र जारी होते ही **प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (pmjjby)** और **प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (pmsby)** के अंतर्गत पात्र बीमा दावों की प्रक्रिया स्वतः शुरू हो जाएगी। इससे मृतक परिवारों को अलग से आवेदन नहीं करना पड़ेगा, प्रक्रियागत देरी कम होगी और समय पर वित्तीय सहायता मिल सकेगी

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