जम्मू-कश्मीर में ‘ईज ऑफ लिविंग’ के लिए सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण में तेजी लाने पर मुख्य सचिव का जोर
श्रीनगर, 16 जुलाई : मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने आज पूर्व आईएएस अधिकारी पी.डब्ल्यू.सी. डेविडार की उपस्थिति में एक उच्च स्तरीय बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में विभिन्न विभागों की सरकारी प्रक्रियाओं को सरल बनाने के रोडमैप पर विस्तार से विचार-विमर्श किया गया। इसका उद्देश्य नागरिकों के लिए ‘ईज ऑफ लिविंग’ सुनिश्चित करना तथा जम्मू-कश्मीर में अधिक कुशल, पारदर्शी और प्रौद्योगिकी आधारित प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करना है।
बैठक में सेवा वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए जटिल प्रक्रियाओं को समाप्त करने, अनावश्यक अनुपालनों को कम करने तथा सरकारी प्रक्रियाओं के पुनर्गठन पर विशेष ध्यान दिया गया, ताकि नागरिकों, उद्योगों और सरकारी संस्थानों को सेवाएं अधिक तेज, सरल और सुलभ रूप से उपलब्ध कराई जा सकें।
तमिलनाडु सरकार की ‘सिंपलगव’ (SimpleGov) पहल के सलाहकार पी.डब्ल्यू.सी. डेविडार ने तमिलनाडु में शासन व्यवस्था के सफल सरलीकरण मॉडल पर विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने प्रशासनिक प्रक्रियाओं में व्यापक सुधार तथा डिजिटल परिवर्तन के माध्यम से सरकारी कार्यप्रणाली को सरल बनाने के अनुभव साझा किए।
प्रस्तुति के दौरान डेविडार ने कहा कि सरलीकरण की प्रक्रिया में तीनों श्रेणियों की सार्वजनिक सेवाओं—सरकार से नागरिक (जी2सी), सरकार से व्यवसाय (जी2बी) तथा सरकार से सरकार (जी2जी)—को शामिल किया जाना चाहिए। इसका मुख्य उद्देश्य अनुपालन संबंधी बोझ को कम करते हुए दक्षता, पारदर्शिता और सेवा वितरण में सुधार लाना है।
उन्होंने अनावश्यक प्रक्रियात्मक आवश्यकताओं, जैसे प्रमाणपत्रों एवं दस्तावेजों की भौतिक प्रतियां जमा कराना, अनेक अनापत्ति प्रमाण-पत्र (एनओसी), लाइसेंस, अनुमतियां तथा अन्य दोहराव वाले अनुपालनों को समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया, क्योंकि इनके कारण नागरिकों और व्यवसायों को अनावश्यक देरी और कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।
डेविडार ने कई ऐसी व्यवस्थागत चुनौतियों की पहचान की जिन पर तत्काल ध्यान देने की आवश्यकता है। इनमें आवेदकों का अनिवार्य भौतिक सत्यापन, पात्रता मानदंडों की अस्पष्टता, अत्यधिक दस्तावेजों की मांग, भुगतान के लिए पारंपरिक माध्यमों पर निर्भरता, विभिन्न स्तरों पर बार-बार सत्यापन, डिजिटल सत्यापन प्रणाली को अपनाने में हिचकिचाहट, सरकारी डाटाबेसों के बीच समुचित एकीकरण का अभाव तथा विभागीय अभिलेखागार से पुराने रिकॉर्ड प्राप्त करने में आने वाली कठिनाइयां शामिल हैं।
सुधारों की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए उन्होंने मौजूदा प्रशासनिक प्रक्रियाओं की व्यापक समीक्षा और पुनर्गठन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कार्यालय-केंद्रित व्यवस्था के स्थान पर परिणाम आधारित एवं नागरिक-केंद्रित शासन प्रणाली अपनाने तथा सभी सार्वजनिक सेवाओं का पूर्णतः एंड-टू-एंड डिजिटलीकरण सुनिश्चित करने का सुझाव दिया।
बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में सिंपलगव पहल के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए बहु-स्तरीय निगरानी व्यवस्था स्थापित की जा रही है। प्रस्तावित प्रणाली के तहत प्रारंभिक स्तर पर सुधार प्रस्तावों की जांच के लिए एक स्क्रीनिंग समिति गठित की जाएगी, जबकि मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक सशक्त समिति नीति निर्धारण, प्रगति की निगरानी तथा विभिन्न विभागों में समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगी।
सरलीकरण की प्रक्रिया के तहत सुझाव दिया गया कि आवेदकों की पहचान एक समान प्रमाणीकरण प्रणाली के आधार पर की जाए तथा पात्रता मानदंडों को स्पष्ट और आवश्यक आवश्यकताओं पर आधारित बनाया जाए। साथ ही सभी स्वीकृतियां एवं सरकारी आदेश क्यूआर कोड युक्त मानकीकृत ऑनलाइन प्रारूप में जारी किए जाएं, ताकि उनकी प्रामाणिकता का तुरंत सत्यापन किया जा सके।
बैठक में सुधारों को संस्थागत स्वरूप देने के लिए आवश्यक कानूनी ढांचे पर भी चर्चा की गई। इस दौरान इस बात पर जोर दिया गया कि सभी सरल प्रक्रियाओं को संबंधित अधिनियमों, नियमों, सरकारी आदेशों तथा अधिसूचित दिशा-निर्देशों का विधिक समर्थन प्राप्त होना चाहिए, ताकि उनके क्रियान्वयन में एकरूपता और वैधानिक मजबूती बनी रहे।
भौतिक सत्यापन के विकल्प के रूप में ई-केवाईसी, डिजिटल हस्ताक्षर, इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (ईवीसी), ई-साइन, डिजीलॉकर तथा अन्य राष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त डिजिटल प्रमाणीकरण प्लेटफॉर्म का व्यापक उपयोग करने की भी वकालत की गई, जिससे सुरक्षित और निर्बाध सेवाएं उपलब्ध कराई जा सकें।
बैठक में यह भी प्रस्ताव रखा गया कि सरकार सभी विभागों पर समान रूप से लागू होने वाला एक व्यापक ओम्निबस आदेश जारी करे, जिसमें सरकारी प्रक्रियाओं के सरलीकरण के उद्देश्य, कार्यान्वयन ढांचा, समय-सीमा और विभागीय जिम्मेदारियां स्पष्ट रूप से निर्धारित हों।
बैठक को संबोधित करते हुए मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के पास व्यापक प्रशासनिक सुधारों को सफलतापूर्वक लागू करने की आवश्यक प्रशासनिक क्षमता, संस्थागत ढांचा और राजनीतिक प्रतिबद्धता उपलब्ध है।
उन्होंने कहा कि लगभग 1,500 सरकारी सेवाओं के डिजिटलीकरण का कार्य पहले ही पूरा किया जा चुका है, जो प्रशासनिक सुधारों के अगले चरण के लिए मजबूत आधार प्रदान करता है।
मुख्य सचिव ने कहा कि बहु-विषयक मुख्य क्रियान्वयन टीम का गठन, व्यापक ओम्निबस आदेश जारी करना तथा मौजूदा नियमों एवं प्रक्रियाओं में आवश्यक संशोधन इस सुधार अभियान की आधारशिला होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि प्रस्तावित बहु-स्तरीय निगरानी तंत्र विभिन्न विभागों के बीच प्रभावी समन्वय, जवाबदेही तथा समयबद्ध क्रियान्वयन सुनिश्चित करेगा।
सफल मॉडलों से सीखने के महत्व पर बल देते हुए अतल डुल्लू ने सुझाव दिया कि जम्मू-कश्मीर के अधिकारियों का एक दल चेन्नई का अध्ययन दौरा करे, ताकि तमिलनाडु की सिंपलगव पहल के क्रियान्वयन का प्रत्यक्ष अध्ययन कर वहां की सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों से सीख ली जा सके। उन्होंने कहा कि इससे जम्मू-कश्मीर में अधिक सरल, पारदर्शी और नागरिक हितैषी प्रशासन विकसित करने की रणनीति को मजबूती मिलेगी।
मुख्य सचिव ने यह भी कहा कि सिंपलगव क्रियान्वयन टीम में सूचना प्रौद्योगिकी और विधि क्षेत्र के विशेषज्ञों को भी शामिल किया जाना चाहिए, ताकि प्रशासनिक सुधारों के तकनीकी और कानूनी दोनों पहलुओं का प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया जा सके। उनका मानना था कि ऐसा समन्वित दृष्टिकोण प्रक्रियाओं को कानूनी रूप से मजबूत, तकनीकी रूप से सक्षम और नागरिकों के लिए अधिक उपयोगी बनाएगा।
मुख्य सचिव ने दोहराया कि सरकार एक ऐसी प्रशासनिक व्यवस्था विकसित करने के लिए प्रतिबद्ध है, जो दक्ष, पारदर्शी, तकनीक-सक्षम और पूर्णतः नागरिक-केंद्रित हो। उन्होंने सभी विभागों से आपसी समन्वय के साथ निर्धारित सुधारों को समयबद्ध ढंग से पूरा करने का आह्वान किया, ताकि सरल प्रशासन का लाभ केंद्र शासित प्रदेश के प्रत्येक नागरिक तक पहुंच सके।
बैठक के दौरान सूचना प्रौद्योगिकी, खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले, स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा, योजना, विकास एवं निगरानी तथा आवास एवं शहरी विकास विभागों के प्रशासनिक सचिवों और वरिष्ठ अधिकारियों ने अपने-अपने विभागों में सेवाओं के सरलीकरण की अब तक की प्रगति प्रस्तुत की। उन्होंने किए गए सुधारों, क्रियान्वयन के दौरान आई चुनौतियों तथा प्राथमिकता के आधार पर और अधिक सेवाओं को सरल बनाने के प्रस्तावों की जानकारी भी दी।