लद्दाख में भारत के सबसे ऊंचे व्यावसायिक लिलियम पुष्प खेती क्षेत्र का विकास शुरू

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लेह, 16 जुलाई : लद्दाख के लेह जिले के चोगलमसर में भारत के सबसे ऊंचे व्यावसायिक लिलियम पुष्प खेती क्षेत्र के विकास कार्य की शुरुआत हो गई है। यह लद्दाख में अपनी तरह की पहली बड़े पैमाने की पुष्पकृषि (फ्लोरीकल्चर) परियोजना है, जिसका उद्देश्य फूलों की खेती के माध्यम से स्थानीय लोगों के लिए आजीविका के नए अवसर सृजित करना है।

पिछले तीन दिनों के दौरान इस पुष्प क्षेत्र में 50 हजार से अधिक उच्च गुणवत्ता वाले लिलियम बल्ब लगाए जा चुके हैं। इन पौधों में पहली बार फूल आने की संभावना इस वर्ष सितंबर के पहले सप्ताह में है।

करीब 93 हजार वर्ग मीटर क्षेत्र में फैला चोगलमसर फ्लावर फील्ड सिंधु नदी के तट पर विकसित किया जा रहा है और इसे देश के सबसे बड़े संगठित उच्च हिमालयी पुष्पकृषि पार्कों में शामिल किया जाएगा। वर्तमान में भारत का सबसे ऊंचा पुष्प क्षेत्र उत्तराखंड के माना में लगभग 3,200 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है, जबकि चोगलमसर फ्लावर पार्क लगभग 3,265 मीटर की ऊंचाई पर विकसित किया जा रहा है।

इस परियोजना का क्रियान्वयन सीएसआईआर-हिमालयी जैव संसाधन प्रौद्योगिकी संस्थान (सीएसआईआर-आईएचबीटी), पालमपुर के वैज्ञानिक एवं तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है। उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने 22 जून 2026 को इस फ्लावर फील्ड की आधारशिला रखी थी।

परियोजना का उद्देश्य उच्च गुणवत्ता वाले लिलियम फूलों एवं कलियों का उत्पादन करना है, जिनकी राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में काफी मांग और बेहतर कीमत मिलती है। इससे स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और सहकारी समितियों के माध्यम से लद्दाख के किसानों के लिए आय का एक नया और स्थायी स्रोत विकसित होगा।

यह पहल केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह के “सहकार से समृद्धि” के विजन के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य सहकारी समितियों को सशक्त बनाकर स्थानीय रोजगार के अवसर बढ़ाना तथा विशेष रूप से महिलाओं और किसानों की आय में वृद्धि करना है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना की परिकल्पना पर आधारित इस परियोजना का उद्देश्य लद्दाख को उच्च गुणवत्ता वाली पुष्पकृषि का उभरता हुआ केंद्र बनाना और यहां के उत्पादों को घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय फूल बाजारों तक पहुंचाना है। साथ ही यह फ्लावर फील्ड भविष्य में पर्यटकों के लिए एक नया आकर्षक पर्यटन स्थल भी बनेगा।

परियोजना के तहत पहले वर्ष कृषि विभाग इस पुष्प क्षेत्र का विकास करेगा और फूल खिलने के बाद इसका संचालन चयनित स्वयं सहायता समूहों एवं सहकारी समितियों को सौंप दिया जाएगा। विभाग इन समूहों और समितियों को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय बाजारों में फूलों की बिक्री के लिए आवश्यक सहयोग और मार्गदर्शन भी देगा, ताकि उन्हें अधिकतम लाभ मिल सके।

अगले वर्ष से सहकारी समितियां स्वयं व्यावसायिक स्तर पर लिलियम की खेती, कटाई तथा मूल्य संवर्धन का कार्य करेंगी। इसके लिए स्थानीय किसानों को वैज्ञानिक पुष्पकृषि, आधुनिक खेती तकनीकों तथा फ्लोरीकल्चर को एक लाभदायक व्यवसाय के रूप में विकसित करने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

लद्दाख की जलवायु लिलियम की खेती के लिए अत्यंत उपयुक्त मानी जाती है। इसके बल्ब शून्य से 4 डिग्री नीचे से लेकर 4 डिग्री सेल्सियस तक के ठंडे तापमान में उत्कृष्ट रूप से विकसित होते हैं, जिससे यह क्षेत्र स्वाभाविक रूप से इसकी खेती के लिए अनुकूल बन जाता है।

लिलियम की खेती का एक महत्वपूर्ण लाभ यह भी है कि लगभग तीन वर्षों के बाद इसके बल्ब स्वयं बढ़ने और गुणा होने लगते हैं। इससे बिना किसी अतिरिक्त निवेश के भविष्य में उत्पादन बढ़ता है और किसानों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

उपराज्यपाल विनय कुमार सक्सेना ने कहा, “लद्दाख की जलवायु, जिसे अक्सर चुनौती माना जाता है, वास्तव में हमारी सबसे बड़ी ताकत है। व्यावसायिक लिलियम खेती शुरू करके हम किसानों, महिलाओं और युवाओं के लिए आय का एक नया रास्ता खोल रहे हैं। हमारा लक्ष्य लद्दाख को उच्च हिमालयी पुष्पकृषि का प्रमुख केंद्र बनाना है, जहां वैज्ञानिक खेती, मूल्य संवर्धन और बेहतर बाजार संपर्क के माध्यम से स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित की जा सके। यह पहल कृषि के विविधीकरण के साथ-साथ स्वयं सहायता समूहों, सहकारी समितियों और युवा उद्यमियों को भी सशक्त बनाएगी।”

लिलियम दुनिया के सबसे अधिक मांग वाले कट-फ्लावरों में से एक है। इसकी आकर्षक सुंदरता और लंबे समय तक ताजा बने रहने की क्षमता के कारण इसका व्यापक उपयोग पुष्प उद्योग और आतिथ्य क्षेत्र में किया जाता है। घरेलू खुदरा बाजार में इसकी प्रीमियम किस्मों की कीमत 150 से 200 रुपये प्रति डंडी तक मिलती है।

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