नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान 614 एफआईआर दर्ज, 646 गिरफ्तार, 435 ड्रग तस्कर पकड़े गए, 160 ड्रग हॉटस्पॉट चिन्हित
श्रीनगर, 09 मई: जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने चल रहे 100 दिवसीय “नशा मुक्त जम्मू-कश्मीर अभियान” के तहत बड़ी सफलता हासिल की है। यह अभियान नशे के दुरुपयोग को रोकने, पुनर्वास व्यवस्था मजबूत करने और नशीले पदार्थों के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई पर केंद्रित है।
अभियान के तहत पूरे जम्मू-कश्मीर में 2,16,123 जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 1 करोड़ से अधिक लोगों ने भाग लिया। जागरूकता अभियान में मेगा पदयात्राएं, स्कूल और कॉलेज कार्यक्रम, गांव स्तर के अभियान, युवा गतिविधियां, सेमिनार, रैलियां, खेल और सांस्कृतिक कार्यक्रम तथा सामुदायिक संवाद शामिल रहे।
काउंसलिंग और मानसिक स्वास्थ्य सहायता को भी मजबूत किया गया है। टेली-मानस काउंसलिंग सेवा पर 2,786 कॉल प्राप्त हुईं, जो लोगों के बढ़ते भरोसे को दर्शाती हैं।
स्वास्थ्य विभाग की नशा उपचार सुविधाओं में 44,602 मरीजों का इलाज किया गया, जिनमें 44,263 ओपीडी और 339 आईपीडी मरीज शामिल रहे। इनमें से 148 मरीज पूरी तरह स्वस्थ होकर घर लौटे।
समाज कल्याण विभाग द्वारा संचालित डीडीएसी पुनर्वास केंद्रों में 441 मरीज भर्ती हुए और 742 लोगों की काउंसलिंग की गई। 18 मरीज पूरी तरह स्वस्थ हुए। पुलिस संचालित डीडीएसी केंद्रों में 451 मरीज पंजीकृत हुए, 786 लोगों को परामर्श दिया गया और 138 लोग सफलतापूर्वक स्वस्थ हुए।
अभियान के तहत ड्रग नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई तेज करते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एनडीपीएस एक्ट के तहत 614 एफआईआर दर्ज कीं। 646 लोगों को गिरफ्तार किया गया, 435 ड्रग तस्करों को पकड़ा गया और 160 ड्रग हॉटस्पॉट चिन्हित किए गए।
सख्त कार्रवाई के तहत 37 मकानों को सील या ध्वस्त किया गया। लगभग 25.97 करोड़ रुपये की अचल संपत्ति जब्त की गई और 3.70 करोड़ रुपये की अतिरिक्त संपत्ति ध्वस्त की गई। 1.67 करोड़ रुपये की चल संपत्ति भी जब्त की गई।
252 ड्राइविंग लाइसेंस और 111 वाहन पंजीकरण रद्द किए गए। 104 मेडिकल स्टोर लाइसेंस निलंबित किए गए तथा 2 लाइसेंस रद्द किए गए।
सुरक्षा एजेंसियों ने 3.8 किलो हेरोइन, 32.92 किलो चरस और 222.31 किलो गांजा बरामद किया। इसके अलावा 21 मरला अवैध पोस्ता खेती भी नष्ट की गई।
सामुदायिक निगरानी को मजबूत करने के लिए 3,067 मेडिकल दुकानों की जांच की गई, 2,815 सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और 977 स्कूलों व अस्पतालों की जांच की गई।