सीडीएस चौहान ने सशस्त्र बलों को एकीकृत और तकनीक-आधारित बनाने पर जोर दिया

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बेंगलुरु, 10 अप्रैल: चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने शुक्रवार को कहा कि भारत के सशस्त्र बलों को एकीकृत, चुस्त और तकनीकी रूप से सक्षम युद्ध प्रणाली में विकसित करना आवश्यक है, जो कई क्षेत्रों में एक साथ प्रभावी ढंग से काम कर सके।

उन्होंने कहा कि आधुनिक युद्ध अब पारंपरिक सीमाओं और समय-सीमाओं से आगे बढ़ चुका है।

‘रण संवाद’ सेमिनार के समापन भाषण में उन्होंने कहा कि मल्टी-डोमेन ऑपरेशंस (एमडीओ) अब केवल एक विचार नहीं, बल्कि वास्तविक ऑपरेशनल सच्चाई बन चुके हैं, जो डेटा एनालिटिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और युद्ध के बदलते स्वरूप से संचालित हो रहे हैं।

उन्होंने कहा, “एमडीओ को इस वर्ष की थीम के रूप में इसलिए चुना गया है क्योंकि यह अब एक नई वास्तविकता है।”

जनरल चौहान ने कहा कि इस सेमिनार की अवधारणा का उद्देश्य रणनीतिक चर्चा में सेवारत अधिकारियों को केंद्र में लाना था, ताकि मध्य और कनिष्ठ अधिकारी भविष्य के युद्ध पर अपने विचार साझा कर सकें।

उन्होंने कहा, “आमतौर पर पूर्व सैनिक या थिंक टैंक अपने विचार रखते हैं, इसलिए मैंने इस परंपरा को बदला।”

उन्होंने यह भी कहा कि सक्रिय सेवा में तैनात अधिकारी युद्ध के बदलते स्वरूप को बेहतर समझते हैं।

सीडीएस ने कहा कि चर्चा में फोर्स डिजाइन, संगठनात्मक ढांचे और मौजूदा व्यवस्थाओं की उपयुक्तता जैसे मुद्दों पर विचार किया गया, क्योंकि आज का युद्ध क्षेत्र अब किसी एक डोमेन तक सीमित नहीं है।

उन्होंने कहा कि इंटेलिजेंस, सर्विलांस और रिकॉनिसेंस (ISR) पर भी चर्चा हुई, जहां समस्या सूचना की कमी नहीं बल्कि उसकी व्याख्या की गति और गुणवत्ता है।

जनरल चौहान ने कहा कि उभरती तकनीकें निर्णय लेने की प्रक्रिया और ऑपरेशनल बढ़त को बदलने की क्षमता रखती हैं, खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और डेटा एनालिटिक्स।

जॉन बॉयड द्वारा प्रस्तुत ओओडीए लूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “जो भी यह चक्र दुश्मन से तेज पूरा करेगा, वही युद्ध में जीतेगा।”

लेकिन उन्होंने कहा कि एआई की भविष्यवाणी क्षमता के कारण अब स्थिति बदल रही है और पहले “ऑरिएंट” करना संभव हो रहा है।

युद्ध की बदलती प्रकृति पर उन्होंने कहा कि अब संघर्ष केवल भौतिक क्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सिंथेटिक और संज्ञानात्मक (कॉग्निटिव) क्षेत्र तक पहुंच चुका है।

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