सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक 2025 लोकसभा में ध्वनिमित से पारित
नयी दिल्ली, 16 दिसंबर : बीमा क्षेत्र में सौ फीसदी विदेश निवेश (एफडीआई) की अनुमति तथा जीवन बीमा निगम (एलआईसी) को ज्यादा स्वायत्तता देने वाले ‘सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा विधि संशोधन) विधेयक 2025’ को लोकसभा ने मंगलवार को ध्वनिमत से पारित कर दिया।
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने विधेयक पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि बीमा विधेयक पर 34 सदस्यों ने विधेयक पर हुई चर्चा में हिस्सा लिया और उन्होंने जो सवाल उठाए हैं वे वाजिब हैं लेकिन विधेयक में उन सब चिंताओं को ध्यान में रखे हुए विधेयक तैयार कर सदस्यों के सवालों का जवाब निहित है। यह विधेयक विनियामक की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है और जिम्मेदारी को पारदर्शी तरीके से लागू करता है।
इसमें किसी भी डेटा को बाहर नहीं लाया जाएगा इसका सख्ती से पालन करने का प्रावधान विधेयक में किया गया है। 14 लाख एजेंटों के बारे में चिंता व्यक्त की गई है और सरकार उनकी सेवाओं को बहुमूल्य मानती है क्योंकि वही बीमा योजना को जमीन पर ले जाते हैं इसलिए उनके महत्व को ध्यान में रखा गया है और उसको सुरक्षित रखते हुए उनकी पहुंच को और भी बढ़ाया जा सकता है। विधेयक में जीवन बीमा को ज्यादा स्वायत्तता भी दी गई ताकि वह अपने हिसाब से जनता के हित में अपना काम को करे और काम का विस्तार करती रहे। इस संशोधन से बीमा योजना को ज्यादा पारदर्शी बनाया जा रहा है।
श्रीमती सीतारमण ने कहा कि इस विधेयक से जीवन बीमा कंपनी-एलआईसी को ज्यादा स्वायत्त बनाया जा रहा है ताकि वह देशभर में अपनी ज्यादा शाखाएं खोल सके। इसके साथ ही विनियामक संस्थाओं को मजबूत किया जा रहा है ताकि बीमा क्षेत्र से ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ा जा सके। इसमें दंड के प्रावधान को एक करोड से बढ़ाकर दस करोड़ रुपए कर दिया गया ताकि बीमा कंपनियां बीमा धारकों की समस्याओं के समाधान में तत्परता दिखाए और किसी को किसी तरह से तंग नहीं होना पड़े। उनका यह भी कहना था कि बीमा कंपनी में इंश्योरेंस शब्द जोड़ने का प्रावधान इस विधेयक में आवश्यक किया गया है ताकि आसानी से इस तरह की कंपनियों की पहचान की जा सके और भ्रमित तरीके से पॉलिसी को बेचने पर रोक लगाई जा सके। इससे बीमा कानून की पहुंच पारदर्शी तरीके से आम लोगों तक हो सकेगी।
विधेयक पर संशोधन को लेकर सदस्यों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि इसमें अब तक 12 बार संशोधन हो चुके हैं और 1950 में एजेंटों के कमीशन को लेकर संशोधन किया गया था और समय समय पर यह परिवर्तन समाज की अपेक्षाओं के अनुसार किए जाते रहे हैं। इसी का परिणाम है कि इस कानून में 1958 के बाद अब तक आठ बार संशोधन हुए हैं और सारे संशोधन जनता की मांग और उनकी शिकायतों के मद्देनजर किए जाते हैं और इस बार भी वही किया गया है। हितधारकों से बात करके ही यह विधेयक लागया गया है। इस विधेयक को बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ाने के लिए लाया गया है क्योंकि प्रतिस्पर्धा से मूल्य स्वत: कम होने लगते हैं और वही सिद्धांत इस विधेयक में भी लागू होगा जिसका फायदा देश के आम लोगों को मिलेगा। सरकार का मानना है कि सभी नागरिकों को बीमा सुरक्षा मिले इस पर सरकार का पूरा ध्यान रहा है और इसी को ध्यान में रखते हुए उनकी सरकार ने पहले कृषि योजना, बीमा योजना आदि लागू की हैं।