विधायक नामांकन मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर तक स्थगित
जम्मू, 26 सितंबर । माननीय उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता पक्ष के अनुरोध पर याचिकाकर्ता के वरिष्ठ वकील की अनुपलब्धता के कारण विधायक नामांकन मामले की सुनवाई आज 16 अक्टूबर तक स्थगित कर दी।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में उपराज्यपाल द्वारा जम्मू-कश्मीर विधानसभा में पाँच विधायकों के नामांकन की शक्तियों और नामांकन के इन प्रावधानों की संवैधानिकता को चुनौती देने वाला एक महत्वपूर्ण मामला आज माननीय उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति संजीव कुमार और न्यायमूर्ति राजेश सेखरी की खंडपीठ के समक्ष आया जिसमें याचिकाकर्ता के लिए सर्वाेच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील डॉ. अभिषेक मनुसिंघवी की अनुपलब्धता के मद्देनजर अल्पकालिक स्थगन के लिए लिखित अनुरोध किया गया था।
अधिवक्ता डी.के. खजूरिया द्वारा याचिकाकर्ता के साथ व्यक्तिगत रूप से प्रतिनिधित्व किए गए याचिकाकर्ता पक्ष के अनुरोध को स्वीकार करते हुए न्यायालय ने सुनवाई की अगली तारीख 16 अक्टूबर तय की। प्रतिवादी पक्ष की ओर से भारत सरकार के वकील विशाल शर्मा, डीएसजीआई और हस्तक्षेपकर्ता सरदार रविंदर सिंह की ओर से एडवोकेट एस. एस. अहमद भी उपस्थित हुए।
जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम में 15 दिसंबर 2023 के संशोधन के तहत जोड़ी गई धारा 15, 15-ए और 15-बी के प्रावधानों को चुनौती देने वाली जनहित याचिका जो उपराज्यपाल को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश विधानसभा की स्वीकृत संख्या से अधिक पाँच विधायकों को नामित करने का अधिकार देती है पूर्व एमएलसी और जेकेपीसीसी के मुख्य प्रवक्ता रविंदर शर्मा द्वारा पिछले साल अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर उच्च न्यायालय में दायर की गई थी।
उच्च न्यायालय की विशेष खंडपीठ ने दोनों पक्षों की विस्तृत सुनवाई के बाद मामले को स्वीकार कर लिया और एक महत्वपूर्ण कानूनी प्रश्न तैयार किया जिसमें कहा गया था क्या जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन अधिनियम 2019 की धाराएँ 15, 15-ए और 15-बी जो विधानसभा की स्वीकृत संख्या से अधिक सदस्यों को मनोनीत करने का प्रावधान करती हैं और जिनमें अल्पमत सरकार को बहुमत सरकार में बदलने और इसके विपरीत संविधान के विरुद्ध हैं और संविधान के मूल ढांचे का उल्लंघन करती हैं।
प्रतिवादी भारत सरकार ने पिछली तारीख को अपना जवाब दाखिल किया जिसमें केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल को जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 5 सदस्यों को मनोनीत करने के प्रावधानों और शक्तियों का बचाव किया गया। अब इस मामले की सुनवाई 16 अक्टूबर को होगी।