लोकसभा और राज्यसभा अनिश्चितकाल के लिए स्थगित, हंगामे की भेंट चढ़ा गया मानसून सत्र
संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही गुरुवार को अनिश्चित काल के लिए स्थगित कर दी गई, जिसके साथ ही संसद का 21 दिवसीय मानसून सत्र समाप्त हो गया। अंतिम दिन भी कई बार कार्यवाही स्थगित हुई और विपक्षी दलों ने बिहार एसआईआर और कथित वोट चोरी के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शन जारी रखा। शुरूआच से ही यह संत्र हंगामेदार रहा। पहले दिन से ही इस एसआईआर को लेकर विपक्ष ने जबरदस्त हंगामा शुरू किया जो आखिरी दिन तक भी जारी रहा। दोनों सदनों की कार्यवाही लगातार बाधित होती रही। हालांकि, ऑपरेशन सिंदूर पर चर्चा के दौरान दोनों सदनों में हंगामा कम देखने को मिला।
लोकसभा की बैठक बृहस्पतिवार को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी गई जिसमें 12 विधेयकों को बिना चर्चा के या संक्षिप्त चर्चा के साथ पारित किया गया। लोकसभा अध्यक्ष ने मानसून सत्र में कार्यवाही में गतिरोध बनाए रखने पर विपक्षी दलों के प्रति निराशा प्रकट करते हुए कहा कि नियोजित तरीके से सदन के कामकाज में व्यवधान पैदा किया गया जो लोकतंत्र और सदन की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। अठारहवीं लोकसभा के पांचवें सत्र की शुरुआत 21 जुलाई को हुई थी जिसमें 14 सरकारी विधेयक पेश किए गए और 12 विधेयक पारित किए गए। इनमें अनुसूचित जनजातियों के विधानसभा क्षेत्रों के पुनर्समायोजन से संबंधित गोवा विधेयक2025, मर्चेंट शिपिंग विधेयक 2025, मणिपुर वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2025, मणिपुर विनियोग (संख्या 2) विधेयक 2025, राष्ट्रीय खेल प्रशासन विधेयक 2025 और राष्ट्रीय एंटी-डोपिंग (संशोधन) विधेयक 2025शामिल हैं।
इनके अलावा आयकर विधेयक 2025, कराधान कानून (संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय बंदरगाह विधेयक 2025, खनिज और खनिज विकास (विनियमन और संशोधन) विधेयक 2025, भारतीय प्रबंधन संस्थान (संशोधन) विधेयक 2025 और ऑनलाइन खेल संवर्धन और विनियमन विधेयक, 2025भी हंगामे के बीच लोकसभा में पारित किए गए। लोकसभा ने प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्रियों और मंत्रियों को गंभीर आपराधिक आरोपों में गिरफ्तार किए जाने और लगातार 30 दिन तक हिरासत में रहने पर पद से हटाए जाने के प्रावधान वाले ‘संविधान (130वां संशोधन) विधेयक, 2025’, ‘संघ राज्य क्षेत्र शासन (संशोधन) विधेयक, 2025’ और ‘जम्मू कश्मीर पुनर्गठन (संशोधन) विधेयक, 2025’ को संसद की संयुक्त समिति को भेजने का निर्णय लिया। सदन में 28 और 29 जुलाई को ऑपरेशन सिंदूर पर विशेष चर्चा बिना किसी व्यवधान के पूरी हुई जिसका जवाब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिया।