**लद्दाख की पश्मीना बनेगी वैश्विक लग्ज़री मानक: उपराज्यपाल कविंदर गुप्ता**

**कहा—हमारा लक्ष्य: पश्मीना का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन लद्दाख से ही हो** **उपराज्यपाल ने ‘पश्मीना कॉन्क्लेव 2026’ को किया संबोधित** **हितधारकों से लद्दाख को वैश्विक पश्मीना उत्कृष्टता केंद्र बनाने का आह्वान**

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**लेह, 24 फरवरी:**
लद्दाख की पश्मीना, जो अपनी अद्वितीय गुणवत्ता, उत्कृष्ट कारीगरी और समृद्ध विरासत के लिए विश्वप्रसिद्ध है, अब वैश्विक स्तर पर लक्ज़री का मानक बनने की ओर अग्रसर है। अपनी अनुपम कोमलता, टिकाऊपन और प्रामाणिकता के साथ लद्दाख की पश्मीना परंपरा और आधुनिक नवाचार का संगम प्रस्तुत करते हुए विश्व स्तरीय लक्ज़री ब्रांड बनने के लिए तैयार है।

यह बात लद्दाख के माननीय उपराज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने ‘पश्मीना कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने लद्दाख की प्रतिष्ठित पश्मीना को वैश्विक स्तर पर मान्यता प्राप्त लक्ज़री ब्रांड में बदलने की परिकल्पना पर प्रकाश डाला।

इस कॉन्क्लेव में पशुपालक, कारीगर, स्वयं सहायता समूह, सहकारी समितियाँ, उद्योग प्रतिनिधि, वित्तीय संस्थान, शोधकर्ता और सरकारी अधिकारी एक मंच पर एकत्र हुए, ताकि पश्मीना क्षेत्र के लिए सतत और समावेशी विकास का मार्ग प्रशस्त किया जा सके।

उपराज्यपाल श्री कविंदर गुप्ता ने कहा कि पश्मीना केवल एक विलासितापूर्ण कपड़ा नहीं, बल्कि लद्दाख की पहचान, विरासत और गौरव है। उन्होंने कहा कि यह नाजुक रेशा समर्पण, धैर्य और कारीगरी की कहानी कहता है। “चांगथांग की बर्फीली और कठोर हवाओं में हमारे पशुपालक चांगरा बकरियों की अत्यंत देखभाल करते हैं और हमारे कुशल कारीगर इस कच्चे रेशे को विश्वस्तरीय वस्त्रों में परिवर्तित करते हैं। यह केवल उत्पादन नहीं, बल्कि प्रकृति, संस्कृति और मानव कौशल के बीच सामंजस्य का जीवंत उदाहरण है,” उन्होंने कहा।

लद्दाख की पश्मीना अर्थव्यवस्था के एक महत्वपूर्ण पहलू पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि विश्व की श्रेष्ठ कच्ची पश्मीना का उत्पादन लद्दाख में होता है, लेकिन उसका अधिकांश मूल्य संवर्धन क्षेत्र के बाहर होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब समय आ गया है कि लद्दाख केवल कच्चा माल आपूर्ति करने वाला क्षेत्र न रहकर मूल्य सृजन का केंद्र बने। “हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—पश्मीना का प्रसंस्करण, ब्रांडिंग और विपणन लद्दाख से ही हो तथा इसे वैश्विक स्तर पर प्रामाणिकता, गुणवत्ता और नैतिक उत्पादन के लिए पहचाना जाए,” उन्होंने कहा।

उपराज्यपाल ने इस परिवर्तन हेतु एक व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि सभी नीतियों में चांगपा पशुपालकों और कारीगरों के कल्याण, ज्ञान और अधिकारों को प्राथमिकता दी जाएगी। गुणवत्ता परीक्षण, फाइबर ग्रेडिंग, प्रमाणन, डिजाइन नवाचार और ब्रांडिंग के लिए आधुनिक संस्थागत ढांचा विकसित किया जाएगा, ताकि लद्दाखी पश्मीना को वैश्विक स्तर पर प्रमाणित और विश्वसनीय मानक मिल सके। उन्होंने यह भी जोर दिया कि विकास पर्यावरणीय रूप से जिम्मेदार और सतत होना चाहिए, विशेषकर चांगथांग की नाजुक पारिस्थितिकी और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए। प्रत्येक कदम वैज्ञानिक योजना और सामुदायिक सहभागिता के साथ उठाया जाएगा, ताकि विरासत और प्रकृति दोनों सुरक्षित रहें।

उन्होंने कहा कि यह कॉन्क्लेव केवल संवाद का मंच नहीं, बल्कि नीतियों और ठोस संस्थागत ढांचे के निर्माण की आधारशिला है, जो लद्दाख की विरासत और आर्थिक भविष्य को सशक्त बनाएगा।

युवा पीढ़ी को संबोधित करते हुए उन्होंने पश्मीना को उनके लिए स्वर्णिम अवसर बताया। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे प्रौद्योगिकी, डिजाइन, विपणन और उद्यमिता के आधुनिक कौशल अपनाकर लद्दाख की पश्मीना को वैश्विक बाजारों तक पहुंचाएं और एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय ब्रांड स्थापित करें। उन्होंने प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता, तकनीकी सहयोग और बाजार संपर्क के माध्यम से पूर्ण सरकारी सहयोग का आश्वासन दिया।

अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सभी हितधारकों से सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया—लद्दाख की पश्मीना को वैश्विक लक्ज़री मानक बनाना, लद्दाख के श्रम को अंतरराष्ट्रीय सम्मान का प्रतीक बनाना और इसकी विरासत को आने वाली पीढ़ियों के लिए शक्ति का स्रोत बनाना।

मुख्य सचिव श्री आशीष कुंद्रा ने पशुपालकों से लेकर डिजाइनरों और सरकारी एजेंसियों तक सभी हितधारकों को एकजुट करने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लद्दाख में प्रतिवर्ष 40–50 टन पश्मीना का उत्पादन होता है, लेकिन अधिकांश लाभ क्षेत्र के बाहर के व्यापारियों को मिलता है। उन्होंने समग्र दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि लद्दाख में ही उच्च गुणवत्ता वाले कश्मीरी शॉल का निर्माण हो और अगली पीढ़ी इस क्षेत्र से जुड़ सके।

सहकारिता सचिव श्री भूपेश चौधरी ने पश्मीना क्षेत्र के विकास में सहकारिता विभाग की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए जलवायु परिवर्तन, सामूहिक प्रयासों और अमूल जैसे सफल सहकारी मॉडल अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया।

युवा सेवा एवं खेल सचिव श्री मोसेस कुंजांग ने उद्योग एवं वाणिज्य विभाग द्वारा अपनाए गए ‘पश्मीना मैट्रिक्स’ की जानकारी दी, जिसमें विभागों के बीच समन्वित कार्य और लक्षित हस्तक्षेप पर जोर दिया गया है।

उद्योग एवं वाणिज्य सचिव सुश्री शशांका अला ने दिनभर आयोजित सत्रों की जानकारी दी, जिनमें फाइबर स्रोत एवं स्थिरता, प्रसंस्करण एवं गुणवत्ता, ग्रेडिंग और मानकीकरण, कारीगर आजीविका एवं डिजाइन प्रासंगिकता, तथा ब्रांड, बाजार और मूल्य संवर्धन जैसे विषय शामिल थे।

कार्यक्रम में केंद्रीय ऊन विकास बोर्ड (वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार) और टेक्सटाइल कमेटी सहित विभिन्न केंद्रीय निकायों के प्रतिनिधि, उद्योग एवं वाणिज्य, पशुपालन, हथकरघा एवं हस्तशिल्प, ग्रामीण विकास तथा सामाजिक एवं जनजातीय कल्याण विभागों के अधिकारी, चांगथांग के पश्मीना पशुपालक, प्रसंस्करण इकाइयाँ, महिला-नेतृत्व वाले एमएसएमई, सहकारी समितियाँ, स्वयं सहायता समूह, स्थानीय डिजाइनर और उद्यमी, तथा प्रतिष्ठित फैशन डिजाइनर एवं उद्योग जगत के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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