भारत–इजरायल साझेदारी होगी विशेष रणनीतिक, मोदी-नेतन्याहू के बीच ईरान फिलिस्तीन पर चर्चा

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नई दिल्ली, 26 फ़रवरी (हि.स.)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ऐतिहासिक इजरायल यात्रा के दौरान दोनों देशों ने अपने संबंधों को शांति, स्मृद्धि और नवाचार पर आधारित ‘विशेष रणनीतिक साझेदारी’ तक ले जाने का फैसला किया है। दोनों नेताओं की मौजूदगी में रक्षा सहयोग, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सायबर और कृषि क्षेत्र में सहयोग के अनेक समझौतों और करारों पर हस्ताक्षर किए गए।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि द्विपक्षीय संबंध गहरे विश्वास और सहयोग पर आधारित हैं जिससे क्षेत्रीय और विश्व स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता की। दोनों नेताओं ने भारत-इजराइल संबंधों के सभी पहलुओं पर चर्चा की। बातचीत में प्रौद्योगिकी और नवाचार, कृत्रिम बुद्धिमत्ता व उभरती तकनीकें, रक्षा-सुरक्षा, व्यापार-अर्थव्यवस्था, श्रम गतिशीलता, शिक्षा, ब्लू इकोनॉमी, कृषि और स्वास्थ्य जैसे क्षेत्र शामिल रहे। क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचार-विमर्श हुआ।

उन्होंने कहा कि महत्वपूर्ण घोषणा करते हुए दोनों देशों ने संबंधों को “शांति, नवाचार और समृद्धि हेतु विशेष रणनीतिक साझेदारी” के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया। तकनीक, विज्ञान, वित्त, संस्कृति और अन्य क्षेत्रों में कई ठोस समझौते भी अंतिम रूप दिए गए।

प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के दौरान ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव पर चर्चा हुई। प्रधानमंत्री मोदी ने भारत के इस पक्ष को दोहराया की सभी मुद्दों का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से बातचीत के जरिए किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि भारत इस दिशा में किए जा रहे किसी प्रयास या पहल में सहयोग देने के लिए तैयार है।

विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने वार्ता के बाद एक पत्रकार वार्ता में कहा कि भारत ने फिलिस्तीन समस्या के संबंध में किए जा रहे शांति प्रयासों का समर्थन किया है। प्रधानमंत्री ने इस संबंध में इजरायल की संसद में दिए गए अपने संबोधन में विस्तार से जिक्र किया है।

मिस्री ने युद्ध विभिषिका के शिकार गाजा के पुनर्निर्माण के संबंध में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि इस काम में भारत अपनी भूमिका निभाने के लिए तैयार है। हमारी भूमिका इस पर निर्भर करेगी कि वहां किस प्रकार गतिविधियां चलाई जाती हैं। भारत इस संबंध में विशेष क्षमता रखता है।

उन्होंने बताया कि भारत पहले से ही 17 करोड़ डॉलर फिलिस्तीन में विभिन्न प्रकल्प चला रहा है। इसके अलावा चार करोड़ डॉलर वाली अन्य परियोजना जल्द ही शुरु होने की प्रक्रिया में है। यह प्रकल्प शिक्षा, स्वास्थ्य और क्षमता निर्माण पर केन्द्रित है। गाजा शांति पहल जैसे आगे बढ़ेगी, उसी के अनुरुप हम अपने योगदान में इजाफा करेंगे।

भारत पश्चिम एशिया यूरोप आर्थिक कोरिडोर (आईमैक) के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में विदेश सचिव ने कहा कि दोनों प्रधानमंत्रियों ने विचार-विमर्श किया। यह परियोजना कैसे आगे बढ़ेगी यह क्षेत्रिया परिस्थितियों पर निर्भर है। इस दिशा में प्रगति के लिए आर्थिक गलियारे से जुड़े देशों के बीच संबंधों पर निर्भर है। फिलहाल विभिन्न देश अपनी क्षमताओं के अनुसार कदम उठा रहे हैं। यह सभी पक्षधारकों की जिम्मेदारी है कि वे इस क्षेत्र में अनुकुल हालात बनाने के लिए काम करें। उन्होंने कहा कि इजरायल इस समय आईमैक का औपचारिक सदस्य नहीं है लेकिन इस परियोजना की सफलता में उसकी प्रमुख भूमिका है। भारत इजरालय और अन्य देशों के संपर्क में है तथा परियोजना को अंजाम तक पहुंचाया जा सके।

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