पहलगाम आतंकी हमले की जांच पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर कठघरे में खड़ा करेगी: अमित शाह

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नई दिल्ली: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शुक्रवार को कहा कि पहलगाम आतंकी हमले की जांच, जिसमें 26 नागरिकों की जान गई थी, अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान को बेनकाब करेगी। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस जांच का अध्ययन दुनिया भर की जांच एजेंसियां करेंगी।

 

नई दिल्ली में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय आतंकवाद-रोधी सम्मेलन–2025 के उद्घाटन अवसर पर संबोधित करते हुए अमित शाह ने कहा कि इस हमले की सफल और व्यापक जांच भारत की आतंकवाद-रोधी क्षमताओं का उत्कृष्ट उदाहरण है।

 

कार्यक्रम के दौरान गृह मंत्री ने एनआईए की अद्यतन अपराध नियमावली (क्राइम मैनुअल), संगठित अपराध नेटवर्क डेटाबेस तथा खोए/लूटे गए और बरामद हथियारों के डेटाबेस का भी अनावरण किया।

 

बैसारन घाटी में हुए पहलगाम हमले का उल्लेख करते हुए शाह ने कहा कि इस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था और इसका उद्देश्य सांप्रदायिक सौहार्द को बिगाड़ना तथा कश्मीर में विकास और पर्यटन के नए दौर को बाधित करना था। उन्होंने कहा कि सटीक खुफिया जानकारी के आधार पर सुरक्षा बलों ने हमले में शामिल तीनों आतंकियों को मार गिराया, जिससे पाकिस्तान को कड़ा संदेश गया।

 

उन्होंने कहा, “यह पहला आतंकी मामला है जिसमें साजिशकर्ताओं को ऑपरेशन सिंदूर के तहत सजा दी गई, जबकि हथियारों के साथ हमला अंजाम देने वाले आतंकियों को ऑपरेशन महादेव के तहत ढेर किया गया।”

 

गृह मंत्री ने कहा कि भारत सरकार, सुरक्षा बलों, खुफिया एजेंसियों और नागरिकों ने मिलकर पाकिस्तान की आतंक मशीनरी को करारा और उपयुक्त जवाब दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि पहलगाम हमले की जांच के निष्कर्ष वैश्विक मंचों पर पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करेंगे।

 

अमित शाह ने जम्मू-कश्मीर पुलिस की भी सराहना की, जिसने लाल किले के पास हुए दिल्ली ब्लास्ट मामले की गहन जांच की। इस विस्फोट में लगभग एक दर्जन लोगों की मौत हुई थी और कई अन्य घायल हुए थे। उन्होंने कहा, “हमारी सभी एजेंसियों ने पूरे आतंकी नेटवर्क को ध्वस्त करने में उत्कृष्ट कार्य किया है।”

 

पहलगाम और दिल्ली ब्लास्ट मामलों की जांच को “अभेद्य और अनुकरणीय” बताते हुए शाह ने कहा कि ये उदाहरण दर्शाते हैं कि सतर्क और सजग पुलिसिंग किस प्रकार बड़े राष्ट्रीय संकटों को टाल सकती है।

 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आतंकवाद के प्रति शून्य सहनशीलता नीति का उल्लेख करते हुए गृह मंत्री ने कहा कि आतंकवाद-रोधी सम्मेलन एक महत्वपूर्ण वार्षिक मंच के रूप में विकसित हुआ है। उन्होंने कहा कि सम्मेलन से निकलने वाले ठोस सुझावों को एनआईए और राज्य एजेंसियों द्वारा लगातार लागू किया जा रहा है, जिससे देश का आतंकवाद-रोधी ढांचा और मजबूत हुआ है।

 

उन्होंने आतंकवाद के बदलते स्वरूप—साइबर युद्ध, आर्थिक नेटवर्क के दुरुपयोग और हाइब्रिड खतरों—पर भी प्रकाश डाला और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए मजबूत राष्ट्रीय तंत्र की आवश्यकता पर बल दिया।

 

सुरक्षा एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय की वकालत करते हुए शाह ने कहा कि सभी एजेंसियों को “टीम इंडिया” की तरह कार्य करना चाहिए ताकि राष्ट्रीय सुरक्षा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने भगोड़े आरोपियों को भारत लौटने के लिए बाध्य करने हेतु ट्रायल-इन-एब्सेंटिया (अनुपस्थिति में मुकदमा) के उपयोग का भी समर्थन किया।

 

उन्होंने कहा, “जैसे-जैसे भारत आगे बढ़ेगा, चुनौतियां भी बढ़ेंगी। देश और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक मजबूत और भविष्य-सक्षम आतंकवाद-रोधी ढांचा तैयार करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।”

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