**डीएमआरआरएंडआर की चौथी एसईसी बैठक की अध्यक्षता सीएस ने की** **संस्थागत एवं समयबद्ध आपदा राहत तंत्र पर दिया जोर**

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**जम्मू, 16 फरवरी:** मुख्य सचिव अतल डुल्लू ने आज आपदा प्रभावित परिवारों को समय पर और प्रभावी राहत उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया। वे आपदा प्रबंधन, राहत, पुनर्वास एवं पुनर्निर्माण विभाग (डीएमआरआरएंडआर) की राज्य कार्यकारी समिति (एसईसी) की चौथी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे।

 

मुख्य सचिव ने Jammu & Kashmir में आपदाग्रस्त समुदायों की संवेदनशीलता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित परिवारों के पास सरकार के सहयोग के अतिरिक्त कोई अन्य सहारा नहीं होता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत सहायता बिना किसी विलंब के प्रभावित परिवारों तक पहुंचनी चाहिए और सहायता वितरण में तत्परता सुनिश्चित की जाए।

 

बैठक में प्रधान सचिव, गृह; विशेष महानिदेशक (समन्वय); विशेष सचिव, वित्त; संबंधित विभागों के वरिष्ठ प्रतिनिधि तथा डीएमआरआरएंडआर के अधिकारी उपस्थित थे।

 

लंबित राहत दावों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए मुख्य सचिव ने पिछले वर्ष आई आकस्मिक बाढ़ से प्रभावित जिलों के उपायुक्तों के पक्ष में लंबित राशि का तत्काल भुगतान करने के स्पष्ट निर्देश दिए। उन्होंने इस संबंध में विस्तृत अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि प्रत्येक जिले की आकलित आवश्यकताओं के अनुरूप ही धनराशि जारी की गई है।

 

आपदाओं की अप्रत्याशित प्रकृति पर जोर देते हुए मुख्य सचिव ने आपात स्थितियों से निपटने के लिए एक सुदृढ़ और स्पष्ट रूप से परिभाषित तंत्र स्थापित करने का आह्वान किया। उन्होंने विभागों को तैयारियों को मजबूत करने, पूर्व-निवारक उपाय अपनाने तथा अधिकारियों की भूमिकाओं और जिम्मेदारियों को स्पष्ट रूप से निर्धारित करते हुए एक मानकीकृत ढांचा संस्थागत रूप से विकसित करने के निर्देश दिए, ताकि जमीनी स्तर पर त्वरित, समन्वित और प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित हो सके।

 

इससे पूर्व प्रधान सचिव, गृह, चंद्राकर भारती ने पिछली एसईसी बैठकों के बाद की गई कार्यवाही प्रतिवेदनों (एटीआर) की जानकारी समिति को दी। उन्होंने बताया कि Jammu और Srinagar के लिए शहरी आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों के गठन की प्रक्रिया प्रगति पर है। उन्होंने यह भी अवगत कराया कि United Nations Development Programme (यूएनडीपी) को जम्मू-कश्मीर में आपदा जोखिम प्रबंधन के लिए तकनीकी भागीदार के रूप में जोड़े जाने की प्रक्रिया जारी है, जिससे केंद्र शासित प्रदेश के लिए एक व्यापक और दूरदर्शी आपदा न्यूनीकरण योजना तैयार की जा सके।

 

प्रधान सचिव ने हालिया आपदाओं के मद्देनजर राज्य आपदा प्रतिक्रिया कोष (एसडीआरएफ) के तहत जिलों को लगभग 96 करोड़ रुपये जारी किए जाने की जानकारी भी दी। उन्होंने विभिन्न क्षमता-विकास पहलों का उल्लेख करते हुए बताया कि विभाग द्वारा जिलों में तैयारी और प्रतिक्रिया क्षमता को सुदृढ़ करने के लिए कई कदम उठाए गए हैं।

 

उन्होंने समिति को यह भी बताया कि National Disaster Management Authority (एनडीएमए) के सहयोग से, Ministry of Home Affairs (एमएचए) के दिशा-निर्देशों के अनुरूप, केंद्र शासित प्रदेश में पोस्ट डिजास्टर नीड्स असेसमेंट (पीडीएनए) किए गए हैं। इन आकलनों का उद्देश्य नुकसान और क्षति का समग्र मूल्यांकन कर एक सुव्यवस्थित पुनर्निर्माण एवं पुनर्प्राप्ति रणनीति तैयार करना है।

 

मंडल और जिला स्तर पर आपदा प्रतिक्रिया को सशक्त बनाने तथा जमीनी स्तर पर इंसिडेंट रिस्पॉन्स सिस्टम (आईआरएस) को क्रियाशील करने के लिए समिति ने दोनों मंडलों और जिलों हेतु एक मानकीकृत आईआरएस अधिसूचना को मंजूरी दी। इससे आपात स्थितियों के दौरान समन्वित, सुसंगत और त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होने की उम्मीद है।

 

बैठक में जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरणों (डीडीएमए) को और सुदृढ़ करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। जानकारी दी गई कि वित्त विभाग केंद्र शासित प्रदेश में डीडीएमए की तकनीकी और संस्थागत क्षमता बढ़ाने के लिए परामर्शदाताओं की नियुक्ति हेतु आवश्यक धनराशि उपलब्ध कराएगा।

 

मुख्य सचिव ने जीवन और आजीविका की सुरक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विभागों को निर्देश दिए कि वे भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए Jammu & Kashmir के लिए एक सशक्त, संवेदनशील और लचीला आपदा प्रबंधन ढांचा विकसित करने की दिशा में कार्य करें।

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