**जलवायु परिवर्तन से आर्थिक अनिश्चितता तक की चुनौतियों के बावजूद कृषि और संबद्ध क्षेत्र हमारी स्थिरता और समृद्धि की गारंटी हैं: उपराज्यपाल**

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**जम्मू, 11 फरवरी:उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा ने कहा कि ‘एग्रीकल्चर फर्स्ट’ नीति विकसित भारत और आत्मनिर्भर जम्मू-कश्मीर के निर्माण में निर्णायक भूमिका निभाएगी। उन्होंने कहा कि कृषि और संबद्ध क्षेत्र किसी भी विकासशील समाज या राष्ट्र के लिए अंतिम बीमा कवच हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।

उपराज्यपाल SKUAST, जम्मू द्वारा आयोजित तीन दिवसीय कृषि शिखर सम्मेलन एवं किसान मेले के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे।

अपने मुख्य संबोधन में उपराज्यपाल ने ‘एआई-संचालित उन्नत कृषि’ के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि ऐसी तकनीकी प्रणालियाँ विकसित की जानी चाहिए जो मौसम, मिट्टी और फसल संबंधी आंकड़ों के आधार पर उत्पादन का पूर्वानुमान लगा सकें, ताकि छोटे और सीमांत किसान अपनी फसल की रणनीतिक योजना बना सकें।

उन्होंने कहा, “तकनीक और कृषि विकास साथ-साथ चलने चाहिए। तकनीकी प्रगति नए स्टार्टअप, उद्योग और यूनिकॉर्न को जन्म देती है, जबकि खेत जीवन को जन्म देते हैं। तकनीक अवसर पैदा करती है और कृषि जीवनयापन सुनिश्चित करती है। मजबूत कृषि, मजबूत राष्ट्र की आधारशिला है। कृषि क्षेत्र राष्ट्रीय लचीलापन, उन्नत अर्थव्यवस्था और मानव समृद्धि की नींव है।”

उपराज्यपाल ने कृषि वैज्ञानिकों और किसानों के अथक परिश्रम व नवाचार के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि भारत का कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों में वैश्विक अग्रणी के रूप में उभरना इन्हीं के प्रयासों का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने ऐसी परिकल्पना की है कि विश्व की हर थाली में कम से कम एक भारतीय व्यंजन हो। जिस दिन यह लक्ष्य हासिल होगा, उस दिन कृषि क्षेत्र विकसित भारत का सबसे बड़ा योगदानकर्ता बनकर उभरेगा।

उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में केंद्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक में जम्मू-कश्मीर के डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के माध्यम से प्रतिदिन 2 लाख लीटर दूध प्रसंस्करण क्षमता को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई है।

उपराज्यपाल ने अधिकारियों, SKUAST और विशेषज्ञों को निर्देश दिया कि आईओटी सेंसर और सैटेलाइट इमेजरी का उपयोग कर ‘डिजिटल फार्म ट्विन’ विकसित किए जाएँ, जिससे सटीक सिंचाई संभव हो और पानी की खपत में 50-60 प्रतिशत तक कमी लाई जा सके।

उन्होंने ऐसे किसान-केंद्रित एआई उपकरण विकसित करने पर बल दिया जो उत्पादन में 15-30 प्रतिशत वृद्धि करें, इनपुट लागत में 50 प्रतिशत तक कमी लाएँ और छोटे व सीमांत किसानों को वास्तविक समय में मिट्टी, फसल स्वास्थ्य और पोषक तत्वों की जानकारी उपलब्ध कराएँ।

उन्होंने कहा, “एआई तकनीक कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में क्रांति लाएगी। हमें जम्मू-कश्मीर के छोटे और सीमांत किसानों के लिए व्यवहार्य, किफायती और उच्च प्रभाव वाले समाधान विकसित करने होंगे।”

उपराज्यपाल ने गांव स्तर पर जलवायु-सहिष्णु स्थानीय किस्मों से युक्त बीज बैंक स्थापित करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा, “वैज्ञानिकों और अधिकारियों को यह समझना होगा कि सभ्यता का भविष्य मिट्टी में बोए गए हर बीज पर निर्भर करता है। कृषि राष्ट्रीय प्रगति और मानव कल्याण का प्रमुख आधार है और वैश्विक उथल-पुथल के बावजूद विकास की गारंटी देती रहेगी।”

उन्होंने परिपत्र कृषि मॉडल (सर्कुलर फार्मिंग) विकसित करने पर विशेष जोर दिया, जिसमें फसल अवशेष उच्च प्रोटीन पशु आहार में परिवर्तित हों और गोबर जैविक खाद के रूप में खेत में लौटे, जिससे मिट्टी की उर्वरता बढ़े और बाहरी इनपुट पर निर्भरता कम हो।

उन्होंने कहा कि सभी 20 जिलों में प्रसंस्करण सुविधाओं का निर्माण जारी रहना चाहिए तथा किसान उत्पादक संगठनों (FPOs) को सीधे उपभोक्ताओं से जोड़कर मूल्य वर्धित उत्पादों का लाभ किसानों तक पहुंचाना चाहिए, जो अक्सर बिचौलियों के पास चला जाता है।

हालिया व्यापार समझौतों को लेकर फैलाई जा रही भ्रांतियों पर प्रतिक्रिया देते हुए उपराज्यपाल ने कहा कि भारत सरकार किसानों के हितों की सुरक्षा के लिए प्रतिबद्ध है और उनके उत्पादन को किसी भी प्रकार की हानि से बचाने हेतु सुदृढ़ सुरक्षा उपाय लागू किए जा रहे हैं।

इस अवसर पर उपराज्यपाल ने भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के अंतर्गत कृषि लागत एवं मूल्य आयोग द्वारा संचालित ‘क्रॉप कल्टिवेशन स्कीम’ का शुभारंभ किया। उन्होंने बेयर लर्निंग सेंटर फॉर एडवांस्ड एग्रीकल्चरल लर्निंग एंड इनोवेशन, ब्रांडिंग सेंटर तथा कीटनाशक गुणवत्ता नियंत्रण प्रयोगशाला सहित कई सुविधाओं का उद्घाटन भी किया।

कार्यक्रम में SKUAST-जम्मू एग्रीथॉन 2.0 के तहत स्टार्टअप फर्स्ट अवॉर्ड विजेताओं को सम्मानित किया गया तथा कृषि एवं संबद्ध क्षेत्रों पर विभिन्न प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

इस अवसर पर कृषि उत्पादन, ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज, सहकारिता एवं चुनाव विभाग के मंत्री श्री जावेद अहमद डार; मुख्य सचिव श्री अटल डुल्लू; अतिरिक्त मुख्य सचिव (कृषि उत्पादन विभाग) श्री शैलेन्द्र कुमार; कुलपति SKUAST-जम्मू प्रो. बी. एन. त्रिपाठी; पद्मश्री डॉ. अशोक कुमार सिंह; निदेशक विस्तार डॉ. अमरीश वैद सहित विभिन्न विभागाध्यक्ष, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, प्रगतिशील किसान, हितधारक और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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