किसानों की बढ़ी आमदनी, मजबूत सरकारी खरीद व्यवस्था और डिजिटल सुधार बने कृषि आत्मनिर्भरता के स्तंभ

न्यूनतम समर्थन मूल्य : सुरक्षा कवच से आत्मनिर्भरता की ओर

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नई दिल्ली, 10 अक्टूबर:

भारत सरकार ने रबी विपणन सत्र 2026-27 और खरीफ विपणन सत्र 2025-26 के लिए सभी प्रमुख फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी है। यह कदम किसानों की आय सुरक्षा के साथ देश को खाद्यान्न और दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

 

नवीन दरों के अनुसार, गेहूं का एमएसपी ₹2,585 प्रति क्विंटल तय किया गया है, जो उत्पादन लागत पर 109 प्रतिशत का लाभ प्रदान करता है। सूरजमुखी (कुसुम) के दाम में ₹600 प्रति क्विंटल और नाइजरसीड में ₹820 प्रति क्विंटल की सर्वाधिक बढ़ोतरी की गई है। सरकार ने अनुमान लगाया है कि रबी सत्र 2026-27 में करीब 297 लाख मीट्रिक टन अनाज की सरकारी खरीद होगी, जिससे किसानों को ₹84,263 करोड़ की आमदनी होगी।

 

(ग्राफ़: 2014-15 से 2024-25 तक एमएसपी के तहत खाद्यान्न खरीद मूल्य में तीन गुना वृद्धि — 1.06 लाख करोड़ से बढ़कर 3.33 लाख करोड़; खरीद मात्रा 761 लाख मीट्रिक टन से बढ़कर 1,175 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची।)

 

कृषि लागत एवं मूल्य आयोग (CACP) द्वारा तय की गई 22 प्रमुख फसलों की एमएसपी में यह वृद्धि सरकार की उस नीति पर आधारित है जिसमें किसानों को उत्पादन लागत पर न्यूनतम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित किया गया है। गेहूं, चना, सरसों, मसूर और जौ जैसी रबी फसलों में बढ़ी एमएसपी दरें किसानों को बेहतर दाम दिलाने और फसल विविधीकरण को प्रोत्साहित करेंगी।

 

एमएसपी खरीद को सुचारू बनाने के लिए सरकार ने प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) के तहत मूल्य समर्थन योजना (PSS) को लागू किया है। नाफेड और एनसीसीएफ जैसी एजेंसियाँ तब खरीद शुरू करती हैं जब बाजार भाव एमएसपी से नीचे गिर जाते हैं। वहीं, एफसीआई और राज्य एजेंसियाँ धान व गेहूं की खरीद सुनिश्चित करती हैं।

 

केंद्र सरकार ने आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के तहत 2028-29 तक अरहर, उड़द और मसूर की संपूर्ण उत्पादन मात्रा की खरीद का संकल्प लिया है। मार्च 2025 तक देश के पाँच राज्यों से 2.46 लाख मीट्रिक टन अरहर दाल खरीदी जा चुकी है, जिससे 1.7 लाख किसानों को सीधा लाभ मिला है।

 

सरकार द्वारा शुरू किए गए डिजिटल पोर्टल — ई-समृद्धि, ई-संयुक्ति और कपास किसान ऐप — किसानों को पंजीकरण, समय निर्धारण और भुगतान की पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन उपलब्ध कराते हैं, जिससे पारदर्शिता और गति दोनों सुनिश्चित हुए हैं।

 

एमएसपी व्यवस्था अब केवल सुरक्षा कवच नहीं बल्कि ‘आत्मनिर्भर कृषि’ की दिशा में प्रेरक तंत्र बन चुकी है। बढ़ी खरीद मात्रा, डिजिटल सुधार और किसानों की बढ़ी भागीदारी ने इसे कृषि सशक्तिकरण और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता का प्रतीक बना दिया है।

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