कड़ी जांच के बाद ही जारी होते हैं एनओसी-वन मंत्री राणा
जम्मू, 07 फरवरी (हि.स.)। जम्मू-कश्मीर सरकार ने विधानसभा को बताया कि वन एवं वन्यजीव विभाग द्वारा नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट केवल निर्धारित नियमों, कानूनी प्रावधानों और गहन जांच के बाद ही जारी किए जाते हैं। इसमें मौके पर जाकर फील्ड वेरिफिकेशन भी अनिवार्य रूप से किया जाता है।
यह जानकारी वन, पारिस्थितिकी एवं पर्यावरण मंत्री जावेद अहमद राणा ने प्रश्नकाल के दौरान विधायक अल्ताफ अहमद वानी के सवाल के जवाब में दी। मंत्री ने बताया कि जनवरी 2024 से दिसंबर 2025 के बीच वाइल्डलाइफ वार्डन, साउथ डिवीजन अनंतनाग कार्यालय को स्थानीय निवासियों से आवास निर्माण के लिए 349 आवेदन प्राप्त हुए। इनमें से 346 मामलों में जांच के बाद एनओसी की सिफारिश की गई जबकि दो आवेदन आवश्यक दस्तावेज न होने के कारण खारिज कर दिए गए। एक अन्य मामले में निर्माण स्थल ओवेरा-आरू वन्यजीव अभयारण्य क्षेत्र में आने के कारण पहले जारी रिपोर्ट को वापस ले लिया गया।
मंत्री ने स्पष्ट किया कि अब्दुल्ला सरकार विकास की वास्तविक जरूरतों और वन्यजीव संरक्षण के बीच संतुलन बनाए रखते हुए पर्यावरण कानूनों का सख्ती से पालन कर रही है। पूरक प्रश्न के उत्तर में उन्होंने बताया कि वन्यजीव विभाग में 517 इम्पैनल्ड कर्मचारी कार्यरत हैं और सभी को नियमित रूप से वेतनध्मजदूरी का भुगतान किया जा रहा है, कोई बकाया नहीं है। वित्तीय स्थिति पर मंत्री ने कहा कि वर्ष 2025-26 के लिए विभाग को 8575.71 लाख आवंटित किए गए हैं, जिनमें से 6291.08 लाख जारी हो चुके हैं और 1391.23 लाख खर्च किए जा चुके हैं। सरकार ने दोहराया कि वह पारदर्शिता, जवाबदेही और सतत विकास के साथ वन्यजीव संरक्षण को मजबूत करने के लिए प्रतिबद्ध है।