ऑपरेशन सिंदूर भारत के सैन्य इतिहास का स्वर्णिम अध्याय: राजनाथ

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नयी दिल्ली 02 मई (वार्ता) रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद का जड़ से खात्मा करने के सरकार के संकल्प को दोहराते हुए शनिवार को उन वीर योद्धाओं को श्रद्धांजलि अर्पित की जिनके अद्वितीय साहस और अडिग आत्मबल ने ऑपरेशन सिंदूर को भारत के सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय बना दिया।

श्री सिंह ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ के उपलक्ष्य में यहां आयोजित ‘शौर्य संध्या’ कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सरकार के आतंकवाद को निर्णायक कार्रवाई के माध्यम से समाप्त करने के अटूट संकल्प का भी उल्लेख किया।

 

रक्षा मंत्री ने सैनिकों के साहस, समर्पण और देशभक्ति की सराहना करते हुए कहा , ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘सेवा परमो धर्म’ की उनकी भावना ने प्राचीन काल से लेकर समकालीन अभियानों जैसे ऑपरेशन सिंदूर तक भारत की सैन्य परंपराओं को परिभाषित किया है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों का साहस केवल युद्धक्षेत्र तक सीमित नहीं है, बल्कि वे देश और विदेश में प्राकृतिक आपदाओं के दौरान प्रथम प्रतिक्रिया देने वाले के रूप में मानवीय सहायता भी प्रदान करते हैं।

 

उन्होंने कहा, “हमारे सैनिक अपने लोगों की रक्षा के लिए हथियार उठाते हैं और संकट के समय जरूरतमंदों तक भोजन और दवाइयां पहुंचाते हैं। यही हमारे सशस्त्र बलों की पहचान है।”

 

यह कार्यक्रम कला और वीरता का एक अनूठा संगम था, जिसमें शीर्ष रक्षा अधिकारी, सैकड़ों सैन्य कर्मी और पद्म श्री पुरस्कार विजेता कलाकार जैसे अनुप जलोटा, कैलाश खेर, हर्षदीप कौर और मनोज मुंतशिर उपस्थित थे।

 

श्री सिंह ने कहा कि वीरता और कला को अक्सर एक-दूसरे के विपरीत माना जाता है, लेकिन वास्तव में वे एक-दूसरे के पूरक हैं। उन्होंने उन्हें मानवीय भावनाओं से उत्पन्न शक्तिशाली अभिव्यक्तियां बताया।

 

रक्षा मंत्री ने कहा कि सैन्य बैंड के मार्चिंग गीत सैनिकों को एकजुट करते हैं, जहां संगीत व्यक्तिगत पहचान को सामूहिक शक्ति में बदल देता है। उन्होंने कहा कि यह भावना सशस्त्र बलों के मूल्यों में गहराई से निहित है।

 

कार्यक्रम में प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, वायु सेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल ए. पी. सिंह, दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह और सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ भी उपस्थित थे।

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