उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में 7.17 लाख किसानों को किया गया जागरूक

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नई दिल्ली, 22 मई (हि.स.)। भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने अपने राष्ट्रव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ के अंतर्गत 7.17 लाख किसानों को उर्वरक के संतुलित उपयोग के बारे में जागरुक किया है। इससे कृषि क्षेत्र की मृदा स्वास्थ्य को बरकरार रखने में मदद मिलेगी।

कृषि मंत्रालय ने एक बयान में बताया कि ‘खेत बचाओ अभियान’ ने किसानों और हितधारकों को वैज्ञानिक पोषक तत्व प्रबंधन के बारे में जागरूक करने के लिए विभिन्न मंचों के माध्यम से देशभर में व्यापक पहुंच स्थापित की है।

इस अभियान में अब तक कुल 12,979 जागरूकता शिविर और सेमिनार आयोजित किए गए हैं। इसमें 7.17 लाख किसानों को प्रत्यक्ष रूप से शामिल किया गया है। क्षमता निर्माण के लिए 3,145 प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किए गए जिनमें 1,11,509 प्रतिभागियों ने भाग लिया। हरी खाद, जैव उर्वरक और जैविक स्रोतों पर 7,928 क्षेत्र प्रदर्शनों के माध्यम से व्यावहारिक ज्ञान प्रदान किया गया।

मंत्रालय ने बताया कि

जमीनी स्तर पर भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए पंचायत, सरपंच और जिला परिषद सदस्यों की सक्रिय भागीदारी के साथ 4,916 जनप्रतिनिधि सम्मेलन आयोजित किए गए।

इस अभियान में किसान संगठनों का भी उपयोग किया गया जिसके अंतर्गत किसान संगठनों (एफपीओ), स्वयं सहायता समूहों (एसएचजी) और किसान समूह (एफआईजी) के माध्यम से 8,383 किसान सदस्यों को जोड़ा गया।

मंत्रालय ने बताया कि व्यापक प्रचार के लिए बैनर, पोस्टर और होर्डिंग्स सहित प्रचार सामग्री को देश भर में 53,616 स्थानों पर प्रदर्शित किया गया। 944 रेडियो वार्ता और 200 टीवी/डिजिटल कार्यक्रमों सहित 1,144 मीडिया प्रसारणों के माध्यम से संदेश को और अधिक प्रभावी बनाया गया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के माध्यम से डिजिटल प्रचार ने अभियान की पहुंच को 2.712 करोड़ लोगों तक पहुंचाया है।

‘खेत बचाओ अभियान’ पहल का उद्देश्य मृदा परीक्षण आधारित पोषक तत्व प्रबंधन को प्रोत्साहित करना और रासायनिक उर्वरकों पर अत्यधिक निर्भरता को कम करना है जिससे मृदा की उर्वरता की रक्षा हो सके और दीर्घकालिक कृषि स्थिरता सुनिश्चित हो सके।

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