अवैध नियुक्ति-पदोन्नति घोटाले में एसआईसीओपी के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ मामला दर्ज

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जम्मू, 29 जनवरी । भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) जम्मू ने राज्य औद्योगिक विकास निगम (एसआईसीओपी) की जम्मू इकाई के वरिष्ठ अधिकारियों के खिलाफ नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं का घोर उल्लंघन करते हुए कथित अवैध नियुक्तियों, नियमितीकरण और बाद में पदोन्नति के संबंध में औपचारिक मामला दर्ज किया है।

एक बयान में एसीबी जम्मू ने पुलिस स्टेशन एसीबी जम्मू में आर.के. राजदान, तत्कालीन एमडी एसआईसीओपी जम्मू (अब सेवानिवृत्त), कुणाल चौधरी (अब उप महाप्रबंधक एसआईसीओपी, जम्मू) और अन्य के खिलाफ अवैध नियुक्ति, नियमितीकरण और पदोन्नति के आरोपों के संबंध में एफआईआर संख्या 01/2026 धारा 5(1)(डी) पठित धारा 5(2) और धारा 120-बी आरपीसी के तहत औपचारिक मामला दर्ज किया है। बयान में कहा गया है कि कुणाल चौधरी जो अब उप महाप्रबंधक, एसआईसीओपी के पद पर कार्यरत हैं की अवैध नियुक्ति, नियमितीकरण और पदोन्नति के आरोपों के संबंध में मामला दर्ज किया गया है।

जांच के दौरान यह बात सामने आई कि तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसआईसीओपी आर.के. राजदान ने अपने आधिकारिक पद का दुरुपयोग करते हुए और अन्य लोगों के साथ आपराधिक साजिश रचते हुए कुणाल चौधरी को बिना किसी समाचार पत्र में विज्ञापन दिए या योग्य उम्मीदवारों से आवेदन आमंत्रित किए बिना 6 महीने की अवधि के लिए अस्थायी तकनीकी सहायक के पद पर नियुक्त किया था। यह अस्थायी नियुक्ति तत्कालीन प्रबंध निदेशक एसआईसीओपी आर.के. राजदान द्वारा पूरी तरह से मनमानी और चयन के आधार पर की गई थी।

आगे की जाँच में पता चला कि महज 6 महीने की अस्थायी सेवा के बाद कुणाल चौधरी (तकनीकी सहायक) को बिना किसी पात्रता मानदंड को पूरा किए और बिना किसी सरकारी नीति के नियमितीकरण की मंजूरी के नियमित कर दिया गया था। इस प्रकार कुणाल चौधरी की नियुक्ति मनमानी और अवैध थी। इसके बाद उन्हें बिना कोई विज्ञापन जारी किए/अन्य पात्र उम्मीदवारों की वरिष्ठता पर विचार किए बिना प्रबंधक के पद पर पदोन्नत कर दिया गया। इस प्रकार तत्कालीन प्रबंध निदेशक, एसआईकोप जम्मू (अब सेवानिवृत्त), आर.के. राजदान ने अपने आधिकारिक पद का घोर दुरुपयोग करते हुए और अन्य लोगों के साथ-साथ कुणाल चौधरी के साथ मिलकर एक सुनियोजित आपराधिक साजिश के तहत उन्हें तकनीकी सहायक के पद पर अवैध रूप से नियुक्त किया जो बाद में एसआईकोप जम्मू के उप महाप्रबंधक के पद तक पहुंचे। यह नियुक्ति मनमाने ढंग से और हेरफेर/सेवा नियमों के विपरीत की गई थी जिससे लाभार्थी को वेतन, भत्ते और वरिष्ठता के रूप में अनुचित लाभ प्राप्त हुआ। बयान में कहा गया है कि आगे की जांच जारी है।

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