देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान

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नयी दिल्ली, 13 अप्रैल (वार्ता) भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून (जून से सितंबर) के लिए दीर्घावधि पूर्वानुमान जारी किया है जिसके अनुसार इस साल देशभर में मानसूनी वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय ने सोमवार को बताया कि मौसम विभाग के मुताबिक, 2026 में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालिक औसत (एलपीए) का लगभग 92 प्रतिशत (±5 प्रतिशत) रहने का अनुमान है। वर्ष 1971-2020 के आधार पर एलपीए 87 सेमी है। इस आधार पर कुल वर्षा 90-95 प्रतिशत के बीच, यानी ‘सामान्य से कम’ श्रेणी में रहने का अनुमान है।

 

मौसम विभाग ने बताया कि इस बार कमजोर ला नीना जैसे हालात धीरे-धीरे समाप्त होकर तटस्थ स्थिति में बदल रहे हैं। हालांकि, अल नीनो मानसून के दौरान विकसित होने की संभावना भी जताई गई है, जो वर्षा को प्रभावित कर सकती है। इसके अलावा हिंद महासागर द्विध्रुव(आईओडी) फिलहाल न्यूट्रल स्थिति में है, लेकिन मानसून के अंत तक इसके पॉजिटिव होने के संकेत हैं, जिससे कुछ क्षेत्रों में वर्षा पर असर पड़ सकता है।

 

मौसम विभाग के अनुसार, जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में बर्फ का विस्तार सामान्य से थोड़ा कम रहा। आमतौर पर यह कारक मानसून वर्षा के साथ उलटा संबंध रखता है, यानी कम बर्फ का मतलब मानसून पर नकारात्मक असर हो सकता है।

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