कृषि की पैदावार बढ़ाना, लागत घटाना और विविधीकरण समय की सबसे बड़ी आवश्यकता : शिवराज

0

रायसेन 11 अप्रैल (वार्ता) केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने शनिवार को कहा कि कृषि को लाभप्रद बनाने के लिए पैदावार में वृद्धि, लागत में कमी और फसलों का विविधीकरण सरकार की शीर्ष प्राथमिकता और वर्तमान समय की जरूरत है।

श्री चौहान यहां आज से शुरू हुए राष्ट्रीय स्तर के ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ 2026 मेले का शुभारंभ के अवसर पर आए हुए थे। यह कृषि मेला 13 अप्रैल तक चलेगा।

 

इस मौके पर उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे केवल पारंपरिक अनाज–प्रधान खेती से आगे बढ़कर एकीकृत कृषि प्रणाली अपनाएँ, क्योंकि जमीन के छोटे–छोटे टुकड़ों- एक, दो या तीन एकड़ पर भी अगर अनाज के साथ फल, सब्जी, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, बकरी पालन और मुर्गी पालन जोड़ा जाए, तो वास्तविक रूप से लाभकारी खेती संभव है। उन्होंने बताया कि इस उन्नत कृषि महोत्सव में एक एकड़ के सम्पूर्ण इंटीग्रेटेड फार्मिंग मॉडल का लाइव डेमो लगाया गया है, और वैज्ञानिक मार्गदर्शन में इस मॉडल को अपनाने पर किसान एक एकड़ में भी दो लाख रुपये से अधिक की आमदनी कमा सकते हैं।

 

उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे तीनों दिन पूरी गंभीरता से इन सत्रों में भाग लें, सीखें और अपनी कृषि पद्धति बदलें, क्योंकि कम जमीन पर अलग–अलग फसलों के साथ अधिक आमदनी प्राप्त करना ही इस महोत्सव का मूल उद्देश्य है। उन्होंने कहा कि वह केवल भाषण देकर लौट जाने वाले नहीं हैं, बल्कि स्वयं भी तीनों दिन यहीं रहकर विभिन्न सत्रों में भाग लेंगे। उन्होंने किसानों का आह्वान किया कि वे भी सूचना के अनुसार अलग–अलग सत्रों में सक्रिय भागीदारी करें।

 

श्री चौहान ने कहा कि इस मेले को मात्र भाषण–कार्यक्रम की बजाय पाठशाला के रूप में तैयार किया गया है, जहाँ देश के शीर्ष वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ और उन्नतशील किसान अलग–अलग हॉलों में लगभग 20 विषयों पर सत्र लेंगे- हॉर्टिकल्चर, बागवानी, इंटीग्रेटेड फार्मिंग, मशीनों के उपयोग से लागत घटाने, ड्रोन के बहुआयामी उपयोग, बाज़ार से जुड़ाव और मिट्टी परीक्षण जैसे विषयों पर विस्तृत प्रशिक्षण दिया जाएगा।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निर्देश पर केंद्र सरकार हर राज्य का कृषि रोडमैप तैयार कर रही है, क्योंकि हर राज्य के मौसम और मिट्टी अलग हैं। इस रोडमैप में किस क्षेत्र में कौन–सी फसल, बागवानी फसल, बीज किस्म जैसी जानकारियों का खाका तैयार किया जा रहा है।

 

उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब बनाने की है, ताकि कच्चे माल से नया उत्पाद बनाकर अधिक मूल्य प्राप्त किया जा सके। उन्होंने बताया कि यहाँ दलहन मिशन को पूरी ताकत से लागू किया जाएगा और मध्य प्रदेश में 55 दाल मिलें खोलने का निर्णय भारत सरकार ने लिया है, ताकि चना, मसूर, उड़द और तुअर जैसी दालों की खेती को मजबूत बाज़ार मिले। उन्होंने स्पष्ट घोषणा की कि किसान जितनी मसूर, उड़द और तुअर पैदा करेंगे और बेचना चाहेंगे, उतनी पूरी मात्रा भारत सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीदने का काम करेगी।

 

श्री चौहान ने नए मृदा ई-फार्म मोबाइल ऐप का उल्लेख करते हुए कहा कि अब किसान केवल मोबाइल लेकर खेत पर घूमेंगे तो तुरंत पता चल जाएगा कि मिट्टी में कौन–से पोषक तत्व हैं और कौन–सी खाद कितनी मात्रा में डालनी है। इससे वैज्ञानिक खाद प्रबंधन को बढ़ावा मिलेगा और किसान अनावश्यक खाद खर्च से बचेंगे तथा उत्पादन भी बढ़ेगा

Leave A Reply

Your email address will not be published.