*आईएनएस तारागिरी ने भारत की समुद्री शक्ति को किया और मजबूत: रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह**

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विशाखापत्तनम: उन्नत स्टील्थ फ्रिगेट INS Taragiri को शुक्रवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारतीय नौसेना में शामिल किया। यह भारतीय नौसेना की क्षमताओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राजनाथ सिंह ने कहा कि यह कमीशनिंग “हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करने वाला कदम है।”

उन्होंने नौसेना की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “हमारी नौसेना, चाहे वह फारस की खाड़ी हो या मलक्का जलडमरूमध्य, हिंद महासागर में लगातार अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। किसी भी संकट की स्थिति में—चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता—हमारी नौसेना हमेशा अग्रिम पंक्ति में रहती है। यह भारत के मूल्यों और प्रतिबद्धता का प्रतीक है। आईएनएस तारागिरी का शामिल होना इस शक्ति को और बढ़ाएगा।”

उन्होंने इस अवसर को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा, “आज अत्याधुनिक युद्धपोत ‘तारागिरी’ भारतीय नौसेना में शामिल हो रहा है। यह भारत की बढ़ती समुद्री शक्ति का प्रतीक है। इस अवसर पर मैं मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और भारतीय नौसेना सहित सभी देशवासियों को बधाई देता हूं।”

रक्षा मंत्री ने भारत के विकास में समुद्री शक्ति के महत्व को भी रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “जब हमारे प्रधानमंत्री विकसित भारत 2047 की बात करते हैं, तो उसमें समुद्री शक्ति की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा और तीन ओर से समुद्र से घिरे देश के रूप में भारत अपने विकास को समुद्र से अलग नहीं देख सकता। लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और हमारी ऊर्जा सुरक्षा भी समुद्र पर निर्भर है। ऐसे में एक मजबूत नौसेना हमारे लिए विकल्प नहीं, बल्कि आवश्यकता है।”

भारत की परिचालन तैयारियों पर उन्होंने कहा, “तनाव की हर स्थिति में भारतीय नौसेना ने हमारे व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित की है। हमारी नौसेना ने यह साबित किया है कि वह न केवल भारत के हितों की रक्षा करने में सक्षम है, बल्कि जरूरत पड़ने पर वैश्विक स्तर पर भी अपने नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित कर सकती है।”

आईएनएस तारागिरी का शामिल होना ऐसे समय में हुआ है जब भारत के पूर्वी तट का सामरिक महत्व लगातार बढ़ रहा है, विशेषकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में बदलती परिस्थितियों के बीच। यह भारतीय नौसेना के अपने बेड़े को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों का हिस्सा है।

प्रोजेक्ट 17A श्रेणी का चौथा शक्तिशाली युद्धपोत होने के नाते, तारागिरी केवल एक जहाज नहीं बल्कि ‘मेक इन इंडिया’ पहल का प्रतीक है। लगभग 6,670 टन वजनी यह फ्रिगेट Mazagon Dock Shipbuilders Limited द्वारा मुंबई में निर्मित किया गया है।

इस जहाज में 75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया गया है, जिसमें 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) का योगदान शामिल है, जिससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है और ‘आत्मनिर्भर भारत’ पहल को बढ़ावा मिला है।

Combined Diesel or Gas (CODOG) प्रणोदन प्रणाली से संचालित यह युद्धपोत उच्च गति और लंबी दूरी तक संचालन की क्षमता रखता है। इसकी हथियार प्रणाली अत्याधुनिक है, जिसमें सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से वायु में मार करने वाली मिसाइलें तथा पनडुब्बी रोधी युद्ध प्रणाली शामिल हैं।

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