महाराजा रणबीर सिंह ने J&K को दूरदृष्टि और संस्कृति प्रदान की: सिन्हा कहा, उनके सुधारों के लिए राष्ट्र उनका ऋणी है
जम्मू, 16 मार्च, 2026: उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने सोमवार को कहा कि राष्ट्र श्री महाराजा रणबीर सिंह जी का ऋणी है, जिन्होंने सुधार किए, जीवंत संस्कृति का निर्माण किया और एक मजबूत एवं समृद्ध जम्मू-कश्मीर का निर्माण किया। उपराज्यपाल ने कहा, “श्री महाराजा रणबीर सिंह ने जम्मू-कश्मीर को केवल एक भूमि के रूप में नहीं, बल्कि एक जीवंत संरचना के रूप में देखा, जहां संस्कृति सांस लेती थी और सुधार ऊर्जा का संचार करते थे। उनके लिए, इसकी आत्मा केवल पहाड़ों और नदियों में नहीं, बल्कि बौद्धिक और आध्यात्मिक मूल्यों में बसती थी।” उपराज्यपाल केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जम्मू कोट भलवाल में श्री महाराजा रणबीर सिंह जी की प्रतिमा के अनावरण समारोह और विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर का नाम बदलकर ‘श्री महाराजा रणबीर सिंह परिसर’ रखने के अवसर पर बोल रहे थे। उपराज्यपाल ने कहा कि श्री महाराजा रणबीर सिंह ने केवल जम्मू-कश्मीर पर शासन ही नहीं किया, बल्कि उन्होंने इसे एक नया दृष्टिकोण दिया, इसका पुनर्गठन किया, इसे ज्ञान से प्रकाशित किया, सांस्कृतिक प्रचुरता से सुशोभित किया और आने वाली पीढ़ियों के लिए एक ऐसी विरासत छोड़ी जो भौतिक, बौद्धिक और आध्यात्मिक स्तरों पर समृद्ध है। उपराज्यपाल ने कहा, “केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय के जम्मू परिसर का नाम बदलना यह साबित करता है कि श्री महाराजा रणबीर सिंह जी द्वारा प्रज्वलित चेतना 150 साल बाद भी जम्मू-कश्मीर के समाज का मार्गदर्शन कर रही है।” उपराज्यपाल ने कहा कि युवाओं को सिद्धांतों के रास्ते पर चलकर एक सुरक्षित और समृद्ध जम्मू-कश्मीर का निर्माण करना चाहिए। उपराज्यपाल ने कहा, “अब हमारे युवाओं का कर्तव्य है कि वे उनके व्यापक, मानवीय मूल्यों को अपनाएं और राष्ट्र-निर्माण में योगदान दें। जैसा कि आज का जम्मू-कश्मीर श्री महाराजा रणबीर सिंह जी की दूरदर्शिता को दर्शाता है, इस परिसर को भी उनके आदर्शों को प्रतिबिंबित करना चाहिए।” उपराज्यपाल ने तकनीकी रूप से सक्षम लेकिन मानवीय रूप से संवेदनशील समाज बनाने पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से न केवल भारत की, बल्कि वैश्विक बौद्धिक और नैतिक चेतना को समृद्ध करने का आह्वान किया। उपराज्यपाल ने कहा, “मानव कल्याण से प्रेरित भारत, विश्व शांति और साझा समृद्धि के लिए प्रतिबद्ध है। अब समय आ गया है कि भारत अपना स्थान पुनः प्राप्त करे और चुनौतियों से जूझती दुनिया का मार्गदर्शन करे। हमें अपने युवाओं को एक मजबूत भारत बनाने के लिए दृढ़ता से तैयार करना चाहिए- एक ऐसा भारत जो देशों को अटूट एकता में पिरोए, उनमें सार्वभौमिक शांति और मानव कल्याण की नेक खोज को जगाए।” उपराज्यपाल ने कहा कि प्राचीन भारत की यात्रा कभी एकतरफा नहीं रही: एक हाथ में विज्ञान था, तो दूसरे में संस्कृति। उन्होंने आगे कहा, “हमने ब्रह्मगुप्त की बुद्धि और बुद्ध के ज्ञान के मिश्रण वाले व्यक्तित्वों पर जोर दिया। इस परिसर को ऐसी आत्माओं का पोषण करना चाहिए।” उपराज्यपाल ने क्षेत्र में गुरुकुल, संस्कृत पाठशाला या वेद पाठशाला की स्थापना के लिए वित्तीय सहायता का भी आश्वासन दिया। इस अवसर पर पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. करण सिंह, पद्म श्री प्रो. विश्वमूर्ति शास्त्री, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जम्मू के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी, कलकत्ता विश्वविद्यालय के संस्कृत विभाग के डॉ. कमल किशोर मिश्रा, केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, जम्मू के कुलसचिव प्रो. आर.जी. मुरली कृष्ण, प्रो. सतीश कुमार कपूर, विश्वविद्यालय के निदेशक, विभागाध्यक्ष और संकाय सदस्य, वरिष्ठ अधिकारी, प्रबुद्ध नागरिक और बड़ी संख्या में छात्र उपस्थित थे।