रेल पटरियों को उन्नत बनाने का 80 प्रतिशत काम पूरा, 50 प्रतिशत मार्ग सेमी हाईस्पीड के लिए तैयार: वैष्णव
नयी दिल्ली, 13 मार्च (वार्ता) रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने शुक्रवार को बताया कि भारतीय रेल नेटवर्क के 50 प्रतिशत रेल-मार्गों को उन्नत कर सेमी-हाई स्पीट रेलगाड़ी चलाने लायक कर दिया गया है जिस पर रेलगाड़ियां 130 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार से सुरक्षित दौड़ सकती है।
राज्य सभा में प्रश्न काल के दौरान अपने मंत्रालय से संबधित पूरक प्रश्नों का जवाब देते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि मोदी सरकार के कार्यकाल में पिछले एक दशक में रेल पटरियों के अपग्रेडेशन (उन्नयन) का काम बहुत गंभीरता से किया जा रहा है। 80 प्रतिशत रेल लाइनों को अपग्रेड कर 110 किलो मीटर प्रति घंटे की रफ्तार के लिए मजबूत और सुरक्षित किया गया है तथा 50 प्रतिशत मार्ग 130 किमी प्रति घंटे की ट्रेनों के लिए उपयुक्त बनाए जा चुके हैं जो सेमी हाई-स्पीड की श्रेणी में आता है।
उन्होंने यात्री ट्रेनों के समय पर परिचालन के रिकार्ड के बारे में एक अनुपूरक प्रश्न के जवाब में कहा कि इस समय रेलवे की 24 डिवीजनों में गाड़ियों के समय पर चलने का रिकार्ड 90 प्रतिशत , 43 डिवीजनों में 80 प्रतिशत और आठ डिवीजनों में 95 प्रतिशत तक पहुंच गया है। मदुरै, रतलाम, हुबली, अजमेर जैसे कुछ डिवीजनों में समयानुसार परिचालन का स्तर 77 प्रतिशत है।
श्री वैष्ण्व ने कहा , “भारतीय रेल का यह प्रदर्शन जर्मनी, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों के स्तर का है पर हमारी तुलना का आधार जापान होना चाहिए जहां समयबद्ध परिलाचन का एक अपना ही पैमाना है।” उन्होंने कहा कि इसके लिए वहां कुछ विशिष्ट कार्य प्रणालियां हैं जिनमें से कुछ को भारतीय रेल में भी अपनाया जा रहा है।
रेल मंत्री ने कहा कि जापान में मरम्मत और रख रखाव की योजना 26 सप्ताह पहले से लागू की जाती है। भारत में भी पिछले दो-ढाई साल से इसकी शुरुआत की गयी है जिसके परिणाम बहुत अच्छे आ रहे हैं। इसके और व्यापक इस्तेमाल और इसमें महारथ हासिल कर लिये जाने के बाद स्थिति में निश्चित रूप से बड़ा सुधार दिखेगा।
उन्होंने कहा कि यात्री ट्रेनों के समय पर आने-जाने को सुनिश्चित करते के लिए भारतीय रेल का मुख्य रूप से प्रौद्योगिकी वाले औजार और समाधान समावेश जिसमें एआई आधारित निगरानी के अलावा रख रखाव पर जोर है। रेल अवसंरचना की निरंतर निगरानी के लिए इंटरनेट ऑफ दी थिंग्स और एआई का भी प्रयाग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सिंगल सेट ट्रेन ( जिसमें इंजन को ट्रेन से अलग नहीं करना पड़ता) से भी समयबद्धता सुधरी है।
उन्होंने कहा कि भारतीय रेल हर रोज 25000 ट्रेनों का परिचालन करती है और इनकी समय सारिणी का प्रबंधन एक जटिल काम है।