**भारत ही विश्व को सही मार्ग दिखाएगा: एलजी सिन्हा**
**कहा— राष्ट्र की शक्ति उसकी आध्यात्मिक चेतना में निहित**
जम्मू तवी, 12 फरवरी: यह कहते हुए कि निकट भविष्य में भारत ही विश्व को सही दिशा प्रदान करेगा, उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को लोगों से भारत के भव्य पुनर्जागरण का उत्सव मनाने का आह्वान किया।
यहाँ थलवाल स्थित माता भद्रकाली अस्थापन में महाशिवरात्रि उत्सव के अंतर्गत आयोजित द्यार धाम समारोह में संबोधित करते हुए एलजी सिन्हा ने कहा, “हजारों वर्षों से भारत की पवित्र धरती आध्यात्मिक उत्कृष्टता की ओर अग्रसर रही है, जहाँ हमारे संतों और महापुरुषों ने चेतना की सर्वोच्च अवस्था प्राप्त की है।”
उन्होंने कहा, “निकट भविष्य में भारत ही विश्व को सही मार्ग दिखाएगा। समाज, विशेषकर युवाओं को चाहिए कि वे अपनी आध्यात्मिक ऊर्जा को तकनीकी और वैज्ञानिक क्षमता के साथ जोड़कर विकास की यात्रा में अन्य देशों से आगे बढ़ें।”
उन्होंने मां शक्ति और भगवान शिव को नमन करते हुए सभी के लिए शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। उपराज्यपाल ने कहा कि भारत ने सदैव सत्य की खोज को सर्वोच्च स्थान दिया है। “हमारी प्राचीन संस्कृति ने शांति, विश्व बंधुत्व, सामाजिक विभाजनों के उन्मूलन, पारस्परिक प्रेम और धर्म के पालन का संदेश दिया है,” उन्होंने जोड़ा।
उन्होंने कहा, “आज की दुनिया में, जहाँ देश एक के बाद एक तकनीकी उपलब्धियाँ हासिल करने की दौड़ में हैं, हमें दिलों को भी उतनी ही गहराई से जोड़ने की आवश्यकता है।”
उपराज्यपाल ने कहा कि भारत एक साथ दो क्रांतियों को जन्म दे रहा है— “बाहरी क्रांति बुनियादी ढांचे, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल अर्थव्यवस्था को सशक्त बना रही है, जबकि आंतरिक क्रांति चेतना, मूल्यों और समाज के लिए वैश्विक दृष्टिकोण को परिवर्तित कर रही है।”
उन्होंने कहा, “हम केवल क्वांटम कंप्यूटिंग में ही अग्रणी नहीं बन रहे, बल्कि दैनिक जीवन में ‘क्वांटम चेतना’ को भी जागृत कर रहे हैं। यह दोहरी क्रांति भारत को केवल समृद्ध ही नहीं, बल्कि संतुलित महाशक्ति बनाएगी।”
उपराज्यपाल ने रेखांकित किया कि भारत की शक्ति केवल मानव संसाधन, नवाचार, स्टार्टअप, विज्ञान और अंतरिक्ष तकनीक में ही नहीं, बल्कि उस आंतरिक आध्यात्मिक ज्योति में भी निहित है, जो सहस्राब्दियों से ज्ञान और साधना के माध्यम से प्रज्वलित होती रही है।
उन्होंने कहा, “भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा सिद्ध करती है कि आध्यात्मिकता और वैज्ञानिक खोज विरोधी नहीं, बल्कि सहयोगी हैं। भारत के लिए प्रयोगशालाएँ और आश्रम प्रतिस्पर्धी नहीं, बल्कि एक ही मार्ग के दो महत्वपूर्ण पड़ाव हैं।”
“हमारे ऋषि-मुनि मूल वैज्ञानिक थे, जिन्होंने दोनों क्षेत्रों में उत्कृष्टता प्राप्त की। आज विश्व यह स्वीकार करता है कि भारत ने मानवता को ज्ञान और आध्यात्मिकता का उपहार दिया, जिसने आधुनिक प्रगति का मार्ग प्रशस्त किया,” उपराज्यपाल ने कहा।
इस अवसर पर उपराज्यपाल ने माता भद्रकाली अस्थापन में सांस्कृतिक विरासत केंद्र का शिलान्यास भी किया। उन्होंने थलवाल में 6.60 करोड़ रुपये की लागत से सामुदायिक सुविधाओं के उन्नयन, घाट निर्माण, पार्किंग, यज्ञशाला, सुरक्षा एवं परिधि दीवार, फेंसिंग और गेट स्थापना जैसे कार्यों के लिए एनएचपीसी की सराहना भी की।