यूएलबी और पंचायत चुनाव जल्द से जल्द कराए जाएंगे, लेकिन एसईसी का पद अभी भी खाली है -मुख्यमंत्री अब्दुल्ला

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जम्मू, 09 फ़रवरी (हि.स.)। जम्मू और कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि सरकार केंद्र शासित प्रदेश में शहरी स्थानीय निकायों और पंचायतों के चुनाव जल्द से जल्द कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था कर रही है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि राज्य चुनाव आयुक्त का पद फिलहाल रिक्त है।

 

विधानसभा में कांग्रेस विधायक तारिक हमीद कर्रा के एक प्रश्न के लिखित उत्तर में अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर पंचायती राज अधिनियम, जम्मू-कश्मीर नगर निगम अधिनियम और जम्मू-कश्मीर नगर निगम अधिनियम, 2000 के तहत मतदाता सूची तैयार करने और चुनाव कराने का अधीक्षण, निर्देशन और नियंत्रण राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के पास है। आयोग (एसईसी) पंचायत और शहरी स्थानीय निकायों के चुनाव जल्द से जल्द कराने के लिए आवश्यक व्यवस्था कर रहा है।

 

हालांकि राज्य चुनाव आयुक्त का पद फिलहाल रिक्त है। साथ ही यह भी बताया कि आरक्षित सीटों का कोटा निर्धारित करने के लिए जम्मू और कश्मीर स्थानीय निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग द्वारा प्रस्तुत रिपोर्ट की जांच चल रही है और तदनुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।

 

मुख्यमंत्री अब्दुल्ला ने सदन को सूचित किया कि पंचायतों और ब्लॉक विकास परिषदों (बीडीसी) का कार्यकाल 9 जनवरी को समाप्त हो गया जबकि जिला विकास परिषद (डीडीसी) का कार्यकाल 24 फरवरी को समाप्त होगा। उन्होंने कहा कि श्रीनगर नगर निगम का कार्यकाल 5 नवंबर, 2023 को समाप्त हो गया जबकि जम्मू के नगर निकाय का कार्यकाल भी उसी महीने 14 नवंबर को समाप्त हो गया। मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि सभी नगर परिषदों और समितियों का कार्यकाल अक्टूबर और नवंबर 2023 के बीच समाप्त हो गया। अब्दुल्ला ने कहा कि पंचायत हलकों का परिसीमन 2018 के पंचायत चुनावों से पहले 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया था।

 

उन्होंने कहा, “पंचायती राज अधिनियम के अनुसार पंचायत हलकों का नया परिसीमन केवल आम जनगणना के जनसंख्या आंकड़ों के प्रकाशन के बाद ही किया जा सकता है। चूंकि 2011 के बाद कोई जनगणना नहीं हुई है इसलिए फिलहाल नए परिसीमन का कोई प्रस्ताव नहीं है।”

 

 

 

उन्होंने आगे कहा कि आवास और शहरी विकास विभाग के निर्देशों के अनुसार 77 शहरी स्थानीय निकायों (यूएलबी) का परिसीमन शुरू कर दिया गया है और बताया कि 72 यूएलबी के लिए प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और शेष पांच के लिए जारी है। आरक्षण के संबंध में मुख्यमंत्री ने कहा कि सरपंच और पंच वार्डों का रोटेशन ग्रामीण विकास विभाग द्वारा किया जाएगा जबकि नगर वार्डों का आरक्षण ओबीसी आयोग की रिपोर्ट की मंजूरी और अधिसूचना के बाद एसईसी द्वारा किया जाएगा।

 

उन्होंने कहा कि पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूचियों को पहले ही संशोधित किया जा चुका है जिसमें 1 जनवरी, 2025 को पात्रता तिथि निर्धारित की गई है जबकि नगरपालिका मतदाता सूचियों का संशोधन परिसीमन पूरा होने और सरकार के निर्देशों के बाद किया जाएगा।

 

अब्दुल्ला ने यह भी बताया कि पंचायत चुनावों के लिए चुनाव सामग्री की खरीद की निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और डीडीसी चुनावों के लिए निविदा प्रक्रिया जारी है। उन्होंने कहा कि 30,000 मतपेटियां खरीदी जा चुकी हैं और जिलों में वितरित की जा चुकी हैं जबकि यूएलबी चुनावों के लिए 7,000 मल्टी-पोस्ट इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनें उपलब्ध कराने के लिए मध्य प्रदेश राज्य चुनाव आयोग के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए गए हैं।

 

पंचायती राज व्यवस्था में सुधारों पर प्रकाश डालते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश में त्रिस्तरीय संरचना लागू की गई है जिसके तहत 4,291 सरपंचों और 33,597 पंचों के चुनाव कराए गए हैं, साथ ही बीडीसी और डीडीसी का गठन भी किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार ने इंटरनेट कनेक्टिविटी से लैस 600 पंचायत भवनों का निर्माण किया है और 2022 से 2025 के बीच 7.25 लाख से अधिक प्रतिभागियों को शासन, योजना और वित्तीय प्रबंधन का प्रशिक्षण दिया है।

 

उन्होंने आगे कहा कि कानूनों में संशोधन के माध्यम से महिलाओं, अनुसूचित जातियों, अनुसूचित जनजातियों और अन्य पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया गया है। अब्दुल्ला ने आगे कहा कि पारदर्शिता, जवाबदेही बढ़ाने और ग्रामीण परिवारों को उनके अधिकारों का रिकॉर्ड प्रदान करने के लिए ईग्रामस्वराज जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म और स्वमित्वा योजना जैसी पहल शुरू की गई हैं।

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