**जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती लगभग शून्य, स्थानीय आतंकियों की संख्या एकल अंक में: सेना प्रमुख**
**आतंक के खिलाफ ‘ऑपरेशन सिंदूर’ जारी** **2025 में मारे गए अधिकांश आतंकी पाकिस्तान मूल के** **विकास, पर्यटन और शांतिपूर्ण अमरनाथ यात्रा से सकारात्मक बदलाव के संकेत** **मई 2025 के भारत–पाक डीजीएमओ संवाद में परमाणु मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं**
**जम्मू तवी, 13 जनवरी:** भारतीय सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने मंगलवार को कहा कि जम्मू-कश्मीर में आतंकियों की भर्ती अब लगभग समाप्त हो चुकी है और सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या घटकर एकल अंक में आ गई है। यह केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा स्थिति में आए बड़े सुधार को दर्शाता है।
2026 की अपनी पहली प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए जनरल द्विवेदी ने कहा कि पिछले वर्ष 10 मई के बाद से पश्चिमी मोर्चे और जम्मू-कश्मीर में स्थिति संवेदनशील जरूर रही है, लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2025 में कुल 31 आतंकियों को मार गिराया गया, जिनमें से करीब 65 प्रतिशत पाकिस्तान मूल के थे। इनमें पहलगाम हमले में शामिल तीन आतंकी भी शामिल थे, जिन्हें ‘ऑपरेशन महादेव’ के तहत ढेर किया गया।
सेना प्रमुख ने कहा,
“सक्रिय स्थानीय आतंकियों की संख्या अब एकल अंक में है। आतंकियों की भर्ती लगभग न के बराबर है और 2025 में केवल दो मामलों की ही सूचना मिली है।”
उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में सकारात्मक बदलाव के कई संकेत दिखाई दे रहे हैं, जिनमें तेज़ विकास कार्य, पर्यटन का पुनरुद्धार और अमरनाथ यात्रा का शांतिपूर्ण आयोजन शामिल है। इस वर्ष अमरनाथ यात्रा में चार लाख से अधिक श्रद्धालुओं ने भाग लिया, जो पिछले पांच वर्षों के औसत से अधिक है।
उन्होंने कहा, “आतंकवाद से पर्यटन की ओर बदलाव धीरे-धीरे वास्तविकता बन रहा है।”
जनरल द्विवेदी ने कहा कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ अभी जारी है और भविष्य में किसी भी दुस्साहस का कड़ा जवाब दिया जाएगा। उन्होंने शांति और स्थिरता बनाए रखने में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों, खुफिया एजेंसियों, नागरिक प्रशासन, राज्य प्रशासन और अन्य मंत्रालयों की सक्रिय भूमिका की सराहना की।
ऑपरेशन सिंदूर को त्रि-सेवा समन्वय (थल, जल और वायु सेना) का एक ऐतिहासिक उदाहरण बताते हुए सेना प्रमुख ने कहा कि इसे स्पष्ट राजनीतिक निर्देशों और पूर्ण परिचालन स्वतंत्रता के साथ अंजाम दिया गया।
उन्होंने कहा,
“7 मई को ऑपरेशन शुरू होने के मात्र 22 मिनट के भीतर और 10 मई तक 88 घंटों में इसके समन्वित क्रियान्वयन से रणनीतिक धारणाएं बदल दी गईं। आतंकी ढांचे पर गहरे प्रहार किए गए और लंबे समय से चल रही परमाणु बयानबाजी की हवा निकल गई।”
उन्होंने बताया कि सेना ने नौ चिन्हित लक्ष्यों में से सात को सफलतापूर्वक नष्ट किया और आवश्यकता पड़ने पर जमीनी आक्रमण के लिए भी पूरी तरह तैयार थी। उनके अनुसार, इस अभियान ने विभिन्न क्षेत्रों में निर्णायक प्रतिक्रिया देने की भारत की क्षमता और तत्परता को प्रदर्शित किया।
सेना प्रमुख ने यह भी कहा कि उच्च स्तरीय संवाद, संपर्कों की बहाली और विश्वास बहाली के उपायों से सीमाओं पर स्थिति के धीरे-धीरे सामान्य होने में मदद मिली है। इससे उत्तरी सीमाओं पर चराई, हाइड्रोथेरेपी शिविरों और अन्य नागरिक गतिविधियों की पुनः शुरुआत संभव हुई है।
उन्होंने कहा,
“निरंतर रणनीतिक दृष्टिकोण के साथ वास्तविक नियंत्रण रेखा पर हमारी तैनाती संतुलित और मजबूत बनी हुई है। साथ ही, संपूर्ण सरकार दृष्टिकोण के तहत क्षमताओं के विकास और आधारभूत ढांचे के सुदृढ़ीकरण पर भी कार्य प्रगति पर है।”
एक प्रश्न के उत्तर में जनरल द्विवेदी ने कहा कि खुफिया सूचनाओं के अनुसार सीमा पार अब भी आठ आतंकी शिविर सक्रिय हैं—दो अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास और छह नियंत्रण रेखा के पार।
उन्होंने कहा,
“इन शिविरों में कुछ स्तर की मौजूदगी या प्रशिक्षण गतिविधियां जारी हैं, इसलिए इन्हें कड़ी निगरानी में रखा गया है। यदि इसी तरह की कोई शत्रुतापूर्ण कार्रवाई की गई, तो उसका निर्णायक जवाब दिया जाएगा।”
उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान किए गए अग्रिम सैनिक मूवमेंट को दोनों पक्षों ने धीरे-धीरे कम किया है, हालांकि सतर्कता पूरी तरह बरकरार है।
मई 2025 के भारत–पाकिस्तान तनाव के दौरान परमाणु धमकियों से जुड़े सवाल पर सेना प्रमुख ने स्पष्ट किया कि दोनों देशों के सैन्य संचालन महानिदेशकों (DGMO) के बीच परमाणु युद्ध को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई।
उन्होंने कहा,
“परमाणु बयानबाजी पाकिस्तान में राजनीतिक या स्थानीय सार्वजनिक तत्वों की ओर से आई थी, न कि वहां की सेना की ओर से। ऐसा कोई संकेत नहीं है कि यह संदेश पाकिस्तानी सशस्त्र बलों की तरफ से दिया गया हो।”