अनेक चुनौतियों के बावजूद हमारा भारत अखंड, एकजुट और मजबूत : मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई

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अनेक चुनौतियों के बावजूद हमारा भारत अखंड, एकजुट और मजबूत : मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई

बीकानेर, 20 सितंबर । उच्चतम न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई ने शनिवार काे बीकानेर में कहा कि आज हमारे पड़ोसी देश घोर अस्थिरता के दौर से गुजर रहे हैं, लेकिन कई आंतरिक और बाह्य चुनौतियों के बावजूद हमारा भारत अखंड, एकजुट और मजबूत है। इसका श्रेय हमारे संविधान तथा संविधान निर्माताओं को जाता है, जिसमें बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है।

सीजेआई गवई महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय में आयोजित ‘संविधान निर्माण के 75 वर्ष और बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर की भूमिका’ विषयक सेमिनार को संबोधित कर रहे थे।

मुख्य न्यायाधीश गवई ने कहा कि देश का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ। इसे लागू हुए हाल ही में 75 वर्ष पूर्ण हुए हैं और हम संविधान का अमृत महोत्सव आयोजित कर रहे हैं। यह संविधान बनाने में बाबा साहेब की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण थी। उनके योगदान को इतिहास में स्वर्णाक्षरों में अंकित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब के संविधान ने ‘वन पर्सन, वन वोट, वन वेल्यू’ का अधिकार दिया। वे सामाजिक और आर्थिक समानता के पक्षधर थे। गवई ने कहा कि भारत का संविधान युद्ध और शांतिकाल में देश को एक सूत्र में बांधने वाला है।

मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि 75 वर्ष का समय लम्बा नहीं होता, लेकिन फिर भी इस दौर में हमारे देश ने बहुत प्रगति की है। हमारी विधायिका, न्यायपालिका और कार्यपालिका ने बेहतर कार्य करते हुए राष्ट्र को और सशक्त किया है। आज देश के वंचित वर्ग के लोग आगे आए हैं। देश के सर्वोच्च पदों पर इस तबके के लोग और महिलाओं को बैठने का मौका हमारे संविधान ने दिया है। देश के हर कौने में सड़क, पानी, बिजली और शिक्षा जैसे सुविधाएं पहुंची हैं।

मुख्य न्यायाधीश गवई ने मां अमृता देवी के पर्यावरण संरक्षण के लिए दिए गए सर्वोच्च बलिदान का स्मरण किया। उन्होंने कहा कि मां अमृता देवी ने सदियों पूर्व पर्यावरण संरक्षण की चेतना जगाई। आज उनके सिद्धांत सर्वाधिक प्रासंगिक हैं। हमें इन्हें समझना और इनका अनुसरण करना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिश्नोई समाज आज भी उनके आदर्शों का अनुसरण कर रहा है।

केंद्रीय विधि एवं न्याय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने कहा कि अमेरिका में महिलाओं को मतदान का अधिकार पाने में 144 साल लगे। ब्रिटेन ने सौ साल के लंबे संघर्ष के बाद दो चरणों में मतदान का अधिकार पाया, लेकिन बाबा साहेब के संविधान ने महिलाओं और पुरुषों को मतदान का समान अधिकार दिया। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब प्रत्येक विषय के जानकार थे। उन्होंने देश को समानता का अधिकार दिया। बाबा साहेब का मानना था कि समानता रहेगी तो स्वतंत्रता अपने आप सुरक्षित होगी। उन्होंने संविधान निर्मात्री सभा में सदस्य रहे बीकानेर के स्व. श्री जसवंत सिंह दाऊदसर के योगदान का स्मरण भी किया।

उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश विजय बिश्नोई ने कहा कि संविधान के कारण ही हमारा देश सुरक्षित है और लोकतंत्र कायम है। उन्होंने कहा कि बाबा साहेब ने समाज में समरसता के भाव जगाए। उन्होंने बताया कि बीकानेर से उनका गहरा नाता रहा। उनके पिता ने राजकीय डूंगर कॉलेज से एलएलबी की डिग्री हासिल की। वकालात के दौर में वे भी बीकानेर आते रहे हैं।

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