मुख्यमंत्री के सलाहकार ने वुलर के संरक्षण और स्थानीय पर्यटन के विकास की समीक्षा की

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श्रीनगर 08 अगस्त। मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने वुलर संरक्षण एवं प्रबंधन प्राधिकरण, वुलर एवं मानसबल विकास प्राधिकरण और ह्यगाम-निंगली-तरज़ू विकास प्राधिकरण के कामकाज से संबंधित एक बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में सोपोर के विधायक इरशाद रसूल कार, पर्यटन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. आशीष चंद्र वर्मा, वन आयुक्त सचिव सुश्री शीतल नंदा, कश्मीर के मुख्य वन संरक्षक इरफान रसूल वानी, कश्मीर पर्यटन निदेशक राजा याकूब और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
सोपोर के विधायक ने डब्ल्यूयूसीएमए और पर्यटन विकास प्राधिकरणों के अलग-अलग काम करने के कई मुद्दे उठाए और वन, पर्यटन, मत्स्य पालन, जल शक्ति और ग्रामीण विकास जैसे विभागों और एजेंसियों के बीच मजबूत समन्वय पर ज़ोर दिया। उन्होंने वटलाब और निंगली में पर्यटन स्थलों की उपेक्षा, गाद निकालने और तलकर्षण की धीमी गति, तथा वुलर झील के संरक्षण और सीमांत गांवों के मछुआरों की आजीविका की रक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता की ओर ध्यान दिलाया।
मुख्यमंत्री के सलाहकार नासिर असलम वानी ने संबंधित विभागों के कार्य-निष्पादन की समीक्षा की और पर्यटन स्थलों के रखरखाव तथा राजमार्ग के किनारे पर्यटकों के लिए सुविधाओं के निर्माण हेतु स्थानों की पहचान करने के निर्देश दिए।
उन्होंने झील के संरक्षण और झील के जलग्रहण क्षेत्र में सतत पर्यटन के विकास हेतु बेहतर योजना बनाने हेतु, विशेष रूप से वन और पर्यटन विभागों के बीच प्रभावी समन्वय का आह्वान किया।
बैठक में बताया गया कि गाद की समस्या से निपटने के लिए 1.21 लाख पेड़ काटे जा चुके हैं और वन विभाग ने चालू वित्त वर्ष के दौरान वुलर झील के संरक्षण हेतु साझा प्रबंधन योजना के क्रियान्वयन हेतु 25 करोड़ रुपये निर्धारित किए हैं।
सलाहकार ने विलो के पेड़ों को हटाने के साथ-साथ ड्रेजिंग और गाद निकालने के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने पेड़ों की कटाई के प्रभाव को कम करने के लिए निर्दिष्ट स्थानों पर प्रतिपूरक वनरोपण के महत्व पर भी बल दिया। सलाहकार ने कहा कि सरकार वुलर-मानसबल विकास प्राधिकरण और ह्यगाम-निंगली-तरज़ू विकास प्राधिकरण के कार्यक्षेत्र का आकलन करेगी ताकि यह देखा जा सके कि क्या इन दोनों पर्यटन प्राधिकरणों का बेहतर संचालन के लिए विलय किया जा सकता है, जबकि डब्ल्यूयूसीएमए वुलर झील के समग्र संरक्षण के लिए काम करना जारी रख सकता है। उन्होंने कहा कि मत्स्य विभाग झील में विभिन्न प्रजातियों की मछलियाँ भरने और जैव विविधता एवं झील पारिस्थितिकी पर काम करने में भी भूमिका निभाएगा।

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