उपराष्ट्रपति चुनाव में राज्यसभा से नहीं उठेगी जम्मू-कश्मीर की आवाज़

जम्मू-कश्मीर से सिर्फ लोकसभा सांसद ही देंगे उपराष्ट्रपति चुनाव में वोट

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  • देहांत सन्देश 

जम्मू तवी, 2 अगस्त:
देश में 17वें उपराष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है, लेकिन एक बार फिर जम्मू-कश्मीर राज्यसभा में गैरमौजूद रहेगा। फरवरी 2021 से जम्मू-कश्मीर की चार राज्यसभा सीटें खाली पड़ी हैं, और अब तक इन्हें भरने की कोई प्रक्रिया शुरू नहीं हुई है। ऐसे में इस बार के उपराष्ट्रपति चुनाव में केवल पांच लोकसभा सांसदों को ही जम्मू-कश्मीर की ओर से मतदान का अवसर मिलेगा।

भारत के उपराष्ट्रपति का चुनाव लोकसभा और राज्यसभा के सभी निर्वाचित और मनोनीत सांसदों द्वारा किया जाता है। परंतु जम्मू-कश्मीर को लगातार दूसरी बार राज्यसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं मिल रहा, जिससे प्रदेश की राष्ट्रीय राजनीति में भागीदारी अधूरी रह जाती है।

उल्लेखनीय है कि जम्मू-कश्मीर में सितंबर-अक्टूबर 2024 में विधानसभा चुनाव हो चुके हैं और NC-कांग्रेस गठबंधन को स्पष्ट बहुमत प्राप्त है। इसके बावजूद, चुनाव आयोग ने राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया आरंभ नहीं की है। गठबंधन तीन राज्यसभा सीटें जीतने की स्थिति में है, जबकि भाजपा अपने 28 विधायकों और पांच नामित विधायकों के समर्थन से एक सीट पर दावा कर सकती है। हालांकि, कांग्रेस ने इन नामांकनों को अदालत में चुनौती दी है, जिससे पूरी प्रक्रिया फिलहाल अटकी हुई है।

इस चुनाव में जम्मू-कश्मीर से डॉ. जितेंद्र सिंह (उधमपुर-डोडा), जुगल किशोर शर्मा (जम्मू-रेसी) — दोनों भाजपा से, आगा रूहुल्ला मेहदी (श्रीनगर) और मियां अल्ताफ अहमद (अनंतनाग-पुंछ-राजौरी) — नेशनल कॉन्फ्रेंस से, और इंजीनियर राशिद (बारामूला) — निर्दलीय, मतदान करेंगे। लद्दाख से मो. हनीफा जान (निर्दलीय) भी वोट डालेंगे।

हालांकि, जम्मू-कश्मीर से भाजपा के नामित राज्यसभा सांसद गुलाम अली खटाना को मतदान का अधिकार प्राप्त है क्योंकि नामित सदस्य भी उपराष्ट्रपति के चुनाव में भाग लेते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर की गैरमौजूदगी से यह स्पष्ट होता है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद प्रदेश में राजनीतिक प्रतिनिधित्व धीरे-धीरे सीमित होता गया है। यह स्थिति न केवल संवैधानिक प्रश्न उठाती है, बल्कि जम्मू-कश्मीर के लोकतांत्रिक ढांचे की पूर्ण भागीदारी पर भी सवाल खड़े करती है।

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