**मुख्य सचिव ने नए श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा की**
### **जम्मू-कश्मीर श्रम सुधारों की दिशा में तेजी से बढ़ा, चार नई श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर जोर**
**श्रीनगर, 15 जुलाई:** मुख्य सचिव **अटल डुल्लू** ने आज भारत सरकार द्वारा लागू की गई **चार नई श्रम संहिताओं (लेबर कोड्स)** के क्रियान्वयन की तैयारियों की समीक्षा के लिए श्रम एवं रोजगार विभाग की बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक में **सचिव श्रम एवं रोजगार**, **आयुक्त सचिव विधि**, **महानिदेशक कोड्स**, **श्रम आयुक्त** तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान श्रम एवं रोजगार विभाग ने विस्तृत प्रस्तुति देते हुए नियम निर्माण की स्थिति, संस्थागत तैयारियों, डिजिटल एकीकरण, जन-जागरूकता अभियानों तथा जम्मू-कश्मीर में नई श्रम व्यवस्था को लागू करने की कार्ययोजना की जानकारी दी।
मुख्य सचिव ने कहा कि नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के कल्याण, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने, औद्योगिक सौहार्द बढ़ाने और कारोबार करने में सुगमता सुनिश्चित करने की दिशा में एक परिवर्तनकारी सुधार हैं।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इनका प्रभावी क्रियान्वयन समावेशी आर्थिक विकास, रोजगार के औपचारिककरण, बेहतर कार्य परिस्थितियों तथा पारदर्शी श्रम प्रशासन को बढ़ावा देगा।
मुख्य सचिव ने श्रम एवं रोजगार विभाग द्वारा श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की दिशा में किए गए प्रयासों की सराहना करते हुए शेष प्रक्रियात्मक औपचारिकताओं को निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा करने के निर्देश दिए।
उन्होंने विभाग को शेष नियमों की अंतिम अधिसूचना शीघ्र जारी करने, डिजिटल प्लेटफार्मों के संचालन के लिए भारत सरकार के साथ समन्वय मजबूत करने, वैधानिक बोर्डों का गठन शीघ्र पूरा करने तथा श्रमिकों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों के लिए व्यापक जागरूकता अभियान जारी रखने के निर्देश दिए, ताकि नई श्रम व्यवस्था का सुचारु क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जा सके।
**सचिव श्रम एवं रोजगार कुमार राजीव रंजन** ने कहा कि नई श्रम संहिताएं स्वतंत्र भारत के सबसे महत्वपूर्ण श्रम सुधारों में से एक हैं। इनके माध्यम से **29 केंद्रीय श्रम कानूनों** को समाहित कर चार व्यापक श्रम संहिताएं बनाई गई हैं, जिनमें **वेतन संहिता, 2019**, **औद्योगिक संबंध संहिता, 2020**, **सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020** तथा **व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020** शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि इन सुधारों का उद्देश्य श्रम प्रशासन को सरल, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी आधारित और श्रमिक-केंद्रित बनाना है, साथ ही कारोबार करने में सुगमता को भी बढ़ावा देना है।
सचिव ने बताया कि जम्मू-कश्मीर ने श्रम संहिताओं के क्रियान्वयन की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति की है और नियम निर्माण की वैधानिक प्रक्रिया पूरी करने वाले अग्रणी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में शामिल है।
**श्रम आयुक्त चरणदीप सिंह** ने बताया कि चारों श्रम संहिताओं के तहत नियम तैयार कर लिए गए हैं। **औद्योगिक संबंध संहिता, 2020** के नियमों को सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद राजपत्र में अंतिम रूप से अधिसूचित किया जा चुका है।
उन्होंने बताया कि **व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य एवं कार्य परिस्थितियां संहिता, 2020** के नियम अंतिम अधिसूचना के चरण में हैं, जबकि **वेतन संहिता, 2019** और **सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020** के नियम स्वीकृति के बाद प्रारंभिक प्रकाशन के लिए जारी किए जा चुके हैं तथा अंतिम अधिसूचना से पहले वैधानिक परामर्श प्रक्रिया जारी है।
बैठक में बताया गया कि पूरे जम्मू-कश्मीर में व्यापक जन-जागरूकता अभियान पहले ही चलाए जा चुके हैं। सभी **20 जिलों** में अब तक **617 सूचना, शिक्षा एवं संचार (आईईसी) शिविर** आयोजित किए गए हैं, जिनके माध्यम से लगभग **पांच लाख श्रमिकों, नियोक्ताओं और अन्य हितधारकों** को नई श्रम संहिताओं के प्रावधानों और लाभों की जानकारी दी गई है।
इसके साथ ही **283 क्षमता निर्माण कार्यक्रम** आयोजित किए गए हैं, जिनसे **7,200 से अधिक अधिकारी, नियोक्ता, श्रमिक संगठन तथा अन्य हितधारक** लाभान्वित हुए हैं। इसके अलावा श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के सहयोग से विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए हैं।
प्रस्तुति के दौरान विभाग ने नई श्रम संहिताओं के तहत किए गए महत्वपूर्ण सुधारों की जानकारी भी दी। इनमें सभी कर्मचारियों के लिए **सार्वभौमिक न्यूनतम वेतन सुरक्षा**, **राष्ट्रीय न्यूनतम वेतन (नेशनल फ्लोर वेज)** की व्यवस्था तथा चारों संहिताओं में **वेतन की समान परिभाषा** शामिल है, जिससे कर्मचारियों को भविष्य निधि (पीएफ), ग्रेच्युटी और अन्य सामाजिक सुरक्षा लाभ अधिक प्रभावी ढंग से मिल सकेंगे।
मुख्य सचिव को बताया गया कि श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए चार वैधानिक निकायों का गठन किया जाएगा। इनमें **असंगठित श्रमिकों के लिए राज्य सामाजिक सुरक्षा बोर्ड**, **भवन एवं अन्य निर्माण कर्मकार कल्याण बोर्ड**, **राज्य वेतन एवं औद्योगिक संबंध सलाहकार बोर्ड** तथा **व्यावसायिक सुरक्षा एवं स्वास्थ्य सलाहकार बोर्ड** शामिल हैं। ये निकाय विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की निगरानी करने के साथ-साथ नीतिगत मार्गदर्शन भी प्रदान करेंगे।
श्रम एवं रोजगार विभाग ने श्रम संहिताओं के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए विस्तृत रणनीति भी प्रस्तुत की। इसके तहत **समर्पित परियोजना प्रबंधन इकाई (पीएमयू)** की स्थापना, **ब्लॉक स्तर पर श्रम सहायकों की तैनाती**, सूचना प्रौद्योगिकी अवसंरचना को मजबूत करना, राष्ट्रीय श्रम पोर्टलों से एकीकरण, व्यापक जन-जागरूकता अभियान तथा संस्थागत क्षमता निर्माण जैसे कदम शामिल हैं।
बैठक में बताया गया कि जम्मू-कश्मीर में मिशन मोड पर श्रम संहिताओं