जम्मू में पीपल के पेड़ खतरे में
वरिष्ठ नागरिकों ने जताया रोष, प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग
Ashu Kumar
जम्मू: पर्यावरण और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने जाने वाले पीपल के पेड़ आज जम्मू शहर में खतरे का सामना कर रहे हैं। पीपल का पेड़ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने, अधिक मात्रा में ऑक्सीजन देने और जैव विविधता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि पीपल जैसे पेड़ पृथ्वी के लिए प्राकृतिक जीवन रक्षक प्रणाली की तरह काम करते हैं। कोविड-19 महामारी के कठिन समय में जब दुनिया भर में ऑक्सीजन की कमी और सांस संबंधी समस्याएँ बढ़ रही थीं, तब पेड़ों ने बिना किसी शोर के वातावरण को शुद्ध करने का कार्य जारी रखा।
भारत में पीपल के पेड़ का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व भी बहुत अधिक है। कई लोग इसे पंच तत्व – वायु, जल, अग्नि, पृथ्वी और आकाश के संतुलन का प्रतीक मानते हैं।
जम्मू में कई पीपल के पेड़ ऐसे हैं जिनकी उम्र 300 से 500 वर्ष बताई जाती है। ये पेड़ आज भी कई मोहल्लों और कॉलोनियों में मौजूद हैं और लोगों को छाया, शुद्ध हवा और प्राकृतिक ठंडक प्रदान कर रहे हैं।
हालांकि हाल के वर्षों में शहर के विभिन्न हिस्सों में इन पेड़ों की कटाई की घटनाओं ने स्थानीय लोगों और पर्यावरण प्रेमियों की चिंता बढ़ा दी है। बताया जा रहा है कि कई जगहों पर अतिक्रमण, निर्माण कार्य और निजी हितों के चलते इन पेड़ों को काटा जा रहा है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि ये पेड़ केवल पेड़ नहीं बल्कि जम्मू की प्राकृतिक धरोहर हैं। “सैकड़ों साल पुराने इन पेड़ों को काटने के बजाय उनकी रक्षा की जानी चाहिए,” एक पर्यावरण कार्यकर्ता ने कहा।
इसी मुद्दे को लेकर कई वरिष्ठ नागरिकों ने विभिन्न इलाकों से मिलकर डिविजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) से मुलाकात की और अपनी नाराजगी जाहिर की। अधिकारियों ने उन्हें आश्वासन दिया कि मामले की जांच कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि अब तक इन पेड़ों की कटाई रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। इससे लोगों के मन में सवाल उठ रहा है कि आखिर वन विभाग इन ऐतिहासिक पेड़ों की सुरक्षा के लिए आगे क्यों नहीं आ रहा।
लोगों का कहना है कि सरकार का नारा “पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ” तभी सार्थक होगा जब पहले से मौजूद पेड़ों को भी बचाया जाए।
पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से मांग की है कि पुराने पेड़ों की पहचान कर उन्हें संरक्षित घोषित किया जाए, उनकी कटाई पर सख्त रोक लगाई जाए और शहर में बड़े स्तर पर वृक्षारोपण अभियान चलाया जाए।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे प्राचीन पेड़ों की रक्षा करना न केवल पर्यावरण संतुलन के लिए जरूरी है बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वस्थ और सुरक्षित भविष्य सुनिश्चित करने के लिए भी आवश्यक है।